संस्कारी बच्चे ही देश के भविष्य का निर्माण करेंगे


लखनऊ।


गीता परिवार के ओर से संचालित तीन दिवसीय अर्जुन भव संस्कार पथ शिविर का आयोजन बुधवार को सागर विहार के गायत्री मंदिर, ऐशबाग के एलडीए पार्क, चौक के बड़ी कालीजी मंदिर तथा सात दिवसीय शिविर का आयोजन राजेन्द्र नगर के महाकाल मंदिर में किया गया। इसके अलावा कई शिविरों का समापन हुआ जहां मुख्य अतिथियों ने विजयी बच्चों को सम्मानित किया। अंजलि गुप्ता के निर्देशन में श्री सिद्धेश्वर मंदिर गौरभीठ में खेल प्रतियोगिता में मनीषा प्रजापति, आदर्श शिविरार्थी में प्रिया प्रजापति, धु्रव साधना में शिफाली रावत, सोनालिका दीक्षित के निर्देशन में विंध्याचल मंदिर में ध्यान में आकृषि सिंह, गीता श्लोक में देवांश वर्मा, मधुराष्टकम में शैली पाण्डेय, आदर्श शिविरार्थी में श्रेयांश शर्मा, जान्हवीराज साहू के निर्देशन में रामप्रसाद बिस्मिल पार्क राजाजीपुरम में भगवद्गीता श्लोक में प्रियांशी, आदर्श शिविरार्थी में विभू श्रीवास्तवा, अर्जुन साधना में दीपांशी, ज्योति शुक्ला के निर्देशन में हनुमान मंदिर पार्क शीतलखेड़ा ऐशबाग में धु्रव साधना में स्नेहा वर्मा, गीता श्लोक में नीलेश वर्मा, सर्वश्रेष्ठ शिविरार्थी में राधा रावत, अंजलि द्विवेदी के निर्देशन में शिवाजी पार्क मॉडल हाउस में सर्वश्रष्ठ ध्यान में दीप्तांशु दास, गीता श्लोक में वैरोनिक सिंह, आदर्श शिविरार्थी में शिविका आरोरा ने बाजी मारी। समापन समारोह पर मुख्य अतिथियों में डा. आशु गोयल गीता परिवार के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष, सुनीता सिंघल क्षेत्र पार्षद, गोपालदास बाजपेई समाजसेवी, गुड्डू जैन, कमल अग्रवाल, नीतिश वर्मा, गोविंद दास, श्याम मनोहर सिंह मौजूद थे। शिविर में सिखायी बातों को बच्चों ने शिविर वृतांत की मनमोहक छठा मुख्य अतिथियों के समक्ष बिखेरी। शिविर सत्रों का संचालन ज्योति गुप्ता, सुभाषिनी गुप्ता, पीयूष गुप्ता, सुमित गुप्ता, ऋषि साहू, मानवीराज साहू, वैष्णवीराज साहू, सूर्या, अंबुज, संस्कार, प्रियांशु, मानवी, रोशनी, अश्विनी, सुविज्ञ तिवारी, कशिश तिवारी, दीपिका मिश्रा, रिया मिश्रा, अनुष्का मौर्य ने किया। डा. आशु गोयल ने बच्चों को विभिन्न प्रकार के संकल्प दिलवाये जैसे- थाली में झूठा न छोड़ना, सत्य बोलना, चुगली न करना इत्यादि। कमल अग्रवाल ने बताया कि आज आधुनिक युग में हमारे बच्चे भारतीय संस्कृति से दूर होते जा रहे है क्योंकि बच्चे ही देश का भविष्य होते है। पीयूष जयसवाल ने कहा कि हम सभी आधुनिक युग के चक्कर में हम अपनी भारतीय संस्कृति से दूर न हो जाए, इसके लिए बच्चों अच्छी और संस्कारित शिक्षा दें ताकि वह देश के विकास में महती भूमिका निभा सकें। शिक्षा में हमेशा संस्कारों का समावेश होना जरूरी है। तभी आने वाले समय में विश्व पटल पर हमारे देश के बच्चे अलग रूतबा हासिल करेंगे और एक नये भारत का निर्माण करेंगे। गीता परिवार 8 से 14 साल के बच्चों को भगवद्गीता श्लोकों को कंठस्थ करने से लेकर अनेक स्त्रोत, देशभक्ति गीत, प्रार्थनाएं आदि बच्चे सहज ही खेल खेल में सिखाया जाता हैं और अत्यंत मनोरंजक व रूचिकर माध्यमों से बालकांे के मन में श्रेष्ठ व भारतीय संस्कृति से ओतप्रोत जीवन जीने की प्रेरणा भी दी जाती है।


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