14 साल बाद कोर्ट से बरी हुए मुख्तार अंसारी सहित सभी आरोपी


नयी दिल्लीः


भाजपा के पूर्व विधायक कृष्णानंद राय हत्याकांड मामले में मंगलवार को दिल्ली की विशेष सीबीआई अदालत ने पूर्व विधायक मुख्तार अंसारी समेत सभी आरोपियों को बरी कर दिया है. करीब 14 साल बाद आए इस फैसले से सवाल उठाने लगा है कि 500 राउंड गोलियां चलीं जिसमें सात लोग मारे गए और कातिल कोई भी नहीं निकला. इस फैसले से कृष्णानंद राय हत्याकांड का राज भी दफन हो गया. 29 नवंबर 2005 की तारीख गाजीपुर के मोहम्मदाबाद से बीजेपी विधायक कृष्णानंद राय और उनके छह साथियों को गोलियों से छलनी कर दिया गया था. हमलावरों ने एके-47 से 500 राउंड गोलियां चलाई थीं. सातों शवों से 100 से ज्यादा गोलियां निकाली गयीं थी.
मामले में फैसला सुनाते हुए दिल्ली की राउज एवेन्यू कोर्ट के स्पेशल जज अरुण भारद्वाज ने फैसले में लिखा कि इस केस की जांच यूपी पुलिस से लेकर सीबीआई को दी गई थी. कृष्णानंद की पत्नी अलका राय की याचिका पर सुप्रीम कोर्ट ने 2013 में केस गाजीपुर से दिल्ली ट्रांसफर कर दिया था. लेकिन दुर्भाग्य से गवाहों के मुकर जाने से यह मामला भी अभियोजन की नाकामी का उदाहरण बन गया. यदि गवाहों को ट्रायल के दौरान विटनेस प्रोटेक्शन स्कीम, 2018 का लाभ मिलता तो नतीजा कुछ और हो सकता था.


बता दें कि 2005 में हुई इस हत्या का आरोप बसपा विधायक मुख्तार अंसारी, मुन्ना बजरंगी समेत पांच लोगों पर था. इसमें से मुन्ना बजरंगी की बीते दिनों जेल में हत्या कर दी गयी थी. इस मामले में कोर्ट का यह फैसला मुख्तार अंसारी के लिए बड़ी राहत माना जा रहा है. मुख्तार अंसारी अपराध की दुनिया से राजनीति में आकर पूर्वांचल का बड़ा नाम बन गया.


पूर्वांचल का बड़ा नाम है मुख्तार अंसारी
पंजाब के जेल में बंद आज मुख्तार अंसारी का नाम उत्तर प्रदेश के माफिया और बाहुबली नेताओं में पहले पायदान पर माना जाता है. मऊ सदर विधायक मुख्तार अंसारी प्रदेश से सैकड़ों किलोमीटर दूर पंजाब की जेल में कैद हैं, लेकिन पूर्वांचल में उनके कुनबे का रसूख बढ़ता ही चला जा रहा है. मई में संपन्न हुए आम चुनाव में मुख्तार के बड़े भाई अफजाल अंसारी और करीबी अतुल राय सांसद चुने गए तो दूसरी ओर जो मुकदमा उनके गले की फांस बना हुआ था वह उससे बरी हो गए.
गाजीपुर जिले के युसुफपुर निवासी मुख्तार अंसारी 2006 से जेल में निरुद्ध हैं और लगातार पांच बार से विधायक हैं. सेंट्रल जेल वाराणसी में निरुद्ध एमएलसी बृजेश सिंह से अदावत के लिए चर्चित मुख्तार अंसारी का नाम नब्बे के दशक में आपराधिक गतिविधियों के लिए पूर्वांचल भर में चर्चाओं में आना शुरू हुआ था. 1996 में मुख्तार अंसारी पहली बार विधानसभा के लिए चुने गए. इसके बाद मुख्तार ने बृजेश सिंह की सत्ता को चुनौती देनी शुरू कर दी थी. 2000 तक इन दोनों के गैंग पूर्वांचल के सबसे बड़े गिरोह बन गए थे.
2005 में विधायक कृष्णानंद राय की हत्या के बाद बृजेश सिंह यूपी छोड़कर फरार हो गए थे और उनका गिरोह कमजोर पड़ने लगा था. इस मौके का फायदा उठाते हुए मुख्तार अंसारी ने पूरे पूर्वांचल पर कब्जा जमा लिया था. हालांकि 2006 में उन्हें गिरफ्तार कर लिया गया था लेकिन वह जेल से गैंग का संचालन करते रहे. इसी दौरान 2008 में बृजेश सिंह को ओडिशा से गिरफ्तार कर लिया गया.
बागपत जेल में बीते साल मारे गए मुन्ना बजरंगी को मुख्तार अंसारी का दायां हाथ माना जाता था. पूर्वांचल की सियासत और अपराध जगत की गहराई से जानकारी रखने वालों का मानना है कि मुख्तार को इन दिनों एक के बाद एक सफलता मिलने से उनके कुनबे का कद बढ़ा है. आगामी दिनों में पूर्वांचल की सियासत पर इसका क्या असर होगा यह देखने लायक बात होगी.


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