क्रोध व अहंकार मनुष्य को नर्क बना देती है- मुनिश्री


श्री दिगम्बर जैन मन्दिर चारबाग में मनाया गया गुरु पूर्णिमा महोत्सव
लखनऊ।


पूज्य गणाचार्य 108 विरागसागर महाराज के शिष्य मुनिश्री 108 विशोक सागर जी महाराज जी के सानिध्य में मंगलवार को श्री 1008 चन्द्रप्रभु दिगम्बर जैन मन्दिर चारबाग में गुरु पूर्णिमा पर्व धूमधाम से मनाया गया। मुनिश्री ससंघ का पूजन विभिन्न द्रव्यों द्वारा किया तथा अर्घ चढ़ाया गया। इस मौके पर मन्दिर में 9 जुलाई से चल रहे श्री सिद्धचक्र महामण्डल विधान का हवन पूजन के साथ समापन हुआ। बाद में प्रवचन में मुनिश्री ने कहा कि मनुष्य को दो चीजों से हमेशा दूर रहना चाहिए एक तो क्रोध व दूसरा अहंकार। यह दोनों चीजें मनुष्य के जीवन को नर्क बना देती हैं। जिस मनुष्य के पास धन नहीं होता उसे नींद से उठाने की जरूरत पड़ती है लेकिन जिसके पास धन होता है उसे सुलाने के लिए नींद की गोलियां देनी पड़ती है। इस लिए धन का लोभ त्यागें और धर्म की राह पर चलिए। 
उन्होंने कहा कि हमें गुरु का हाथ नहीं पकड़ना चाहिए बल्कि गुरु को अपना हाथ पकड़ाना चाहिए क्योंकि मुश्किल समय में हम गुरु का हाथ छोड़ सकते हैं लेकिन गुरु हमारा हाथ कभी नहीं छोड़ेगा। विशोक सागर जी महाराज ने कहा कि साधु और गुरू में अंतर होता है। साधु स्वयं के लिए होता है और अपना कल्याण करता है जब कि गुरु शिष्यों के लिए समर्पित होता है और अपने शिष्यों का कल्याण करता है। 

गोमतीनगर जैन मन्दिर में  हुआ विश्व शांति महायज्ञ
गोमतीनगर जैन मन्दिर में चल रहे श्री सिद्धचक्र महामण्डल विधान का मंगलवार को हवन पूजन के साथ समापन हुआ। ग्वालियर के प्रतिष्ठाचार्य अजीत शास्त्री ने भक्ति संगीत के साथ लोगों ने प्रभु को एक हजार चैबीस अर्घ चढाये। बाद में विश्वशांति की कामना हेतु हवन यज्ञ हुआ। इस मौके पर राजीव जैन, संजीव जैन, अनुराग जैन, श्री जैन धर्म प्रवर्द्धनी सभा के अध्यक्ष विनय जैन मौजूद रहे। 


 

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