जिले में बढ़ता अवैध कोचिंग सेंटरों का साम्राज्य

सरकारी टीचर कॉलेजों में ना पढ़ाकर, घर पर दे रहे कोचिंग
साकेत कॉलोनी में अपने घर पर ही चलाते हैं कोचिंग सेंटर


हाथरस।


एक समय वह था जब स्कूलों में पढ़ कर ही बच्चे बहुत होशियार और काबिल हो जाते थे और बड़ी-बड़ी नौकरी आसानी से लग जाती थी क्योंकि उस समय अध्यापक अपने विद्यर्थियों पर ध्यान देते थे, उनको पढ़ाते थे। आज के दौर में ऐसा नहीं देखने को मिल रहा है। आज अध्यापक लाखों रुपए की सरकार से तनख्वाह लेने के बावजूद भी स्कूलों में बच्चों को पढ़ाना नहीं चाहते हैं। घर पर कोचिंग देने के लिए बच्चों पर दबाव डालने का काम भी आज के युग के अध्यापक कर रहे हैं।
बागला इंटर कॉलेज ने अपने नाम का डंका पूरे देश में बजाया है। लेकिन आज यह अपने अस्तित्व को बचाने की लड़ाई लड़ रहा है जिसकी मुख्य वजह है कॉलेज के कुछ अध्यापकों द्वारा छात्रों की पढ़ाई पर ध्यान ना देना। बागला इंटर कॉलेज के एक अध्यापक जो कि विज्ञान वर्ग को पढ़ाते हैं, वह तो अपनी दबंगई का डंका कॉलेज में इस तरह बजा रहे हैं कि उनके डर की वजह से बच्चे उन पर कोचिंग लेने के लिए मजबूर हैं।
बताया जाता है कि यह अध्यापक बच्चों को उनके विषय में फेल करने की धमकी दे देते है। कहते है कि अगर मुझ पर कोचिंग नहीं पढ़ोगे तो तुमको मैं फेल कर दूंगा। नाम ना छापने की शर्त पर इस अध्यापक की कोचिंग में  पढ़ने वाले कुछ बच्चों ने बताया कि यह सर गिर्राज कॉलोनी में अपने घर पर ही कोचिंग सेंटर चलाते हैं। क्योंकि स्कूल में तो यह सही से पढ़ाते नहीं है और हम को फेल करने तक की धमकी भी देते हैं। इसलिए मजबूरी में अपने भविष्य को देखते हुए हम इन पर कोचिंग पढ़ रहे हैं। ऐसे अध्यापक बच्चों को गुमराह कर रहे हैं और कई हजार रुपये की सैलरी सरकार से लेने के बावजूद भी घर पर बच्चों को ट्यूशन दे रहे हैं जबकि ऐसा नहीं होना चाहिए।
सरकार द्वारा नियम तो यह है कि सरकारी अध्यापक ट्यूशन नहीं पढ़ा सकता है। लेकिन नियमों को ताक पर रखकर यह अध्यापक अधिकारियों की ईमानदार कार्यप्रणाली पर सवालिया निशान लगा रहा है, उनके आदेशों की धज्जियां भी खुलेआम उड़ा रहा है। अधिकारियों को इस ओर ध्यान देना चाहिए और गिरते हुए शिक्षा के स्तर को उठाना चाहिए। अगर ऐसे अध्यापकों पर अधिकारियों द्वारा लगाम नहीं कसी गई तो एक दिन स्कूलों की शिक्षा बंद हो जाएगी और इस तरह के अध्यापक घर पर ही ट्यूशन देकर अपनी मोटी कमाई करते रहेंगे। आज शिक्षा का ढांचा पूरी तरह से गिर चुका है और सरकार भी शिक्षा के ढांचे को मजबूत बनाने के लिए करोड़ों रुपए को पानी की तरह बहा रही है। इसलिए ऐसे अध्यापकों पर कार्यवाही कर उनको सजा देनी चाहिए। जिससे कि शिक्षा का स्तर सुधर सके।


 


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