बापू आज विश्व चिन्तन का विषय हैं : राज्यपाल



राज्यपाल और मुख्यमंत्री ने गांधी-शास्त्री को दी श्रद्धांजलि
लखनऊ।

उत्तर प्रदेश की राज्यपाल आनंदीबेन पटेल एवं मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने आज यहां राष्ट्रपिता महात्मा गांधी की 151वीं जयन्ती तथा पूर्व प्रधानमंत्री लाल बहादुर शास्त्री जी की जयन्ती के अवसर पर लखनऊ में आयोजित विभिन्न कार्यक्रमों में शामिल हुए। राज्यपाल एवं मुख्यमंत्री ने सर्वप्रथम सुबह जीपीओ पार्क स्थित गांधी जी की प्रतिमा पर माल्यार्पण एवं पुष्पांजलि अर्पित की। इसके बाद राज्यपाल एवं मुख्यमंत्री ने हजरतगंज स्थित गांधी आश्रम में गांधी जी एवं शास्त्री जी के चित्र पर माल्यार्पण कर अपनी श्रद्धांजलि दी। उन्होंने लाल बहादुर शास्त्री भवन (एनेक्सी) में भी शास्त्री जी की प्रतिमा पर श्रद्धांसुमन अर्पित कर अपनी भावभीनी श्रद्धांजलि दी। इस अवसर पर राज्यपाल एवं मुख्यमंत्री ने गांधी आश्रम में चरखा भी चलाया।
गांधी आश्रम में आयोजित जयन्ती समारोह में अपने सम्बोधन में राज्यपाल ने कहा कि राष्ट्रपिता महात्मा गाँधी की जयन्ती पर आयोजित कार्यक्रम में मैं उन्हें अपनी भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए नमन करती हूँ। आज ही के दिन पूर्व प्रधानमंत्री स्वर्गीय लाल बहादुर शास्त्री का भी जन्म हुआ था। मैं उन्हें भी अपनी श्रद्धांजलि अर्पित करती हूँ। गाँधी जी और शास्त्री जी हमारे देश की ऐसी महान विभूतियाँ है, जिन्होंने देश हित के लिये जीवन पर्यन्त संघर्ष किया।
उन्होंने कहा कि आप सभी जानते हैं कि गाँधी जी केवल हमारे राष्ट्र के ही नहीं, बल्कि पूरे संसार की महान विभूति हैं, जिन्होंने सत्य और अहिंसा के मार्ग पर चलकर बड़े साहस और संयम से स्वतंत्रता आन्दोलन का नेतृत्व किया और देश को स्वाधीन कराकर ही दम लिया। उन्होंने कहा कि बापू आज विश्व चिन्तन का विषय हैं, चाहे वह रोजगार हो या विश्व-शांति की स्थापना हो प्रत्येक क्षेत्र में वे प्रासंगिक हैं।
राज्यपाल ने कहा कि गाँधी जी का मानना था कि जिस देश या समाज के पास चिन्तन और चेतना नहीं है, वह ज्ञान और सेवा का देश या समाज नहीं बन सकता। उन्होंने त्याग, समाज सेवा और राष्ट्र सेवा का ऐसा आदर्श प्रस्तुत किया, जिसके फलस्वरूप देशवासियों ने गाँधी जी को संत मान लिया। महात्मा गाँधी के ग्राम स्वराज्य की संकल्पना में खादी और ग्रामोद्योग को सबसे ज्यादा बढ़ावा दिया गया। खुशी की बात है कि आज गाँधी आश्रम देश एवं प्रदेश में खादी और अन्य ग्राम्य उद्योगों के विकास में सक्रिय योगदान दे रहा है।
राज्यपाल ने कहा कि गाँधी जी समस्त मानव-जाति का सम्मान करते थे, परन्तु महिलाओं के लिए उनके हृदय में अत्यन्त गहरी सहानुभूति और आदर का भाव था। स्वतंत्रता आन्दोलन के दौरान उन्होंने अनेक महिलाओं को न केवल स्वतंत्रता संघर्ष में योगदान के लिये प्रेरित किया, बल्कि उन्हें नेतृत्व करने का भी अवसर प्रदान किया। वे पुरूषों के मुकाबले महिलाओं को अधिक सहृदय मानते थे। उन्होंने महात्मा गांधी के प्रिय भजन 'वैष्णव जन तो तेने कहिये जे पीड पराई जाणे रे' के इतिहास पर भी प्रकाश डाला।
इसके अलावा राजभवन के गांधी सभागार में आयोजित जयन्ती समारोह में राजभवन के बच्चों ने गांधी जी के प्रिय भजनों 'रघुपति राघव राजा राम', 'वैष्णव जन तो तेने कहिये' तथा 'दे दी हमें आजादी', 'ए बापू की लाठी', 'बन्दे में था दम' तथा गांधी सिद्धांत पर आधारित नृत्य एवं मनमोहक रंगारंग सांस्कृतिक कार्यक्रम राज्यपाल महोदया के सामने प्रस्तुत किये।
राज्यपाल ने इन छोटे एवं नन्हें कलाकारों की मनमोहक एवं मनोरंजक प्रस्तुति पर खुशी जाहिर करते हुए कहा कि आज राजभवन में पहली बार गांधी जयन्ती पर राजभवन के ही बच्चों ने अपनी कला एवं प्रतिभा का जो परिचय दिया है, वह अत्यन्त ही सराहनीय है। उन्होंने सांस्कृतिक कार्यक्रम के संयोजक एवं इस सांस्कृतिक कार्यक्रम एवं बच्चों को अत्यन्त ही अल्प समय में तैयार करने तथा माता-पिता को इसमें सहयोग प्रदान करने के लिए हार्दिक बधाई दी। उन्होंने राज्यपाल सचिवालय के अधिकारियों एवं कर्मचारियों को अपने आस-पास, कार्यालय एवं राजभवन परिसर को स्वच्छ बनाये रखने में सक्रिय सहयोग प्रदान करने की अपेक्षा भी की।
इस अवसर पर राजभवन के अधिकारियों एवं कर्मचारियों के अलावा बच्चों के माता-पिता एवं अभिभावक भी उपस्थित थे।




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