बैजापुर हत्याकांड में निष्पक्ष जांच के लिए डीएनए जांच के अलावा उठी तफ्तीश हटाने की मांग

सुलतानपुर।


बहुचर्चित बैजापुर हत्याकांड में आरोपी की माँ ने अज्ञात युवती के शव को गलत ढ़ंग से गायब मनीषा का शव बताकर फर्जी खुलासा करने का आरोप लगाते हुए दूध-का-दूध, पानी-का-पानी करने के लिए डीएनए जांच कराये जाने की मांग की है। वहीं यह खुलासा करने वाली जिले की पुलिस पर अविश्वास जाहिर करते हुए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को पत्र भेजकर स्वतंत्र जांच एजेंसी से तफ्तीश कराने की मांग की है। बेटे व पति को निर्दोष बताकर न्याय के लिए दौड़ रही पीड़ित माँ ने जांच में जुटे अधिकारी पर एसपी के दबाव में सबूतों से छेड़छाड़ करने एवं भेदभावपूर्ण तफ्तीश करने का भय बताया है।
मालूम हो कि धम्मौर थाना क्षेत्र के अमेठा गांव निवासी बृजेश यादव उसकी पत्नी एवं छोटे भाई धर्मेन्द्र यादव के खिलाफ बीते एक जुलाई की घटना बताते हुए गायब मनीषा के पिता ने 10 जुलाई को बहला-फुसलाकर भगा ले जाने के आरोप में मुकदमा दर्ज कराया। बृजेश की मां सरस्वती के मुताबिक इस मामले में जब पुलिस पूंछतांछ के लिए बृजेश के घर पहुंची तो उन्हें भी मनीषा के गायब होने की जानकारी मिली। जिसके बाद अमेठा गांव में निवासे पर रह रहे बृजेश ने अपनी सास के विपक्षी वीरू यादव व मोनू यादव एवं गायब मनीषा के भाई अनिल कोरी पर षड्यंत्र के तहत मनीषा को कहीं गायब कराने की बात कहते हुए निष्पक्ष जांच को लेकर एसपी समेत अन्य को पत्र भेजकर फर्जी केस से बचाने के लिए बीते 19 जुलाई को ही मांग की थी। फिलहाल पुलिस ने इस बिन्दु पर जाकर कोई तफ्तीश ही नहीं की। मामले में पुलिस के बुलाने पर कई बार आरोपी थाने जाकर तफ्तीश में सहयोग भी करते रहें। पुलिस ने प्रथम दृष्ट्या कोई सबूत उनके खिलाफ न मिलने पर कोई कार्यवाही भी नहीं की और उन्हें जांच में सहयोग कर गायब लड़की को ढूंढने के लिए कहा। इसी बीच बीते 10 सितम्बर की सुबह कोतवाली देहात थाना क्षेत्र के बैजापुर गांव में युकोलिप्टस के पेड़ से दुपट्टे से लटकी हुई नग्न अवस्था में अज्ञात युवती का शव पाया गया। अज्ञात युवती के साथ दुष्कर्म व आप्रकृतिक दुष्कर्म के बाद गला दबाकर हत्या करने की भी बात सामने आयी। यह घटना देखने व सुनने वालों का दिल दहल उठा। फिलहाल पुलिस ने इसे एक सामान्य घटना का रूप देने की नीयत से शुरूआती दौर में मामले को दबाना चाहा। बाद में सिर्फ हत्या की बात सामने लायी गयी। शव की शिनाख्त कराने के नाम पर तीन दिन तक शव का पोस्टमार्टम भी नहीं कराया गया। जिसके पीछे पुलिस के जरिये रेप से जुड़े सबूत नष्ट करने की वजह नजर आयी। पोस्टमार्टम रिपोर्ट में बरामद युवती के साथ हुए अप्राकृतिक दुष्कर्म व दुष्कर्म को लेकर दो स्लाइडे भी बनायी गयी। जिसे जांच के लिए भेजने के बजाय पुलिस ने दबाये रखा। करीब 22 दिनों तक शव की शिनाख्त न होने एवं दोषियों की गिरफ्तारी न होने के चलते पुलिस की कार्यशैली के प्रति लोगों का काफी आक्रोश रहा और मामला सुर्खियों में छाया रहा। मामला इतना छा गया कि एसपी समेत अन्य की कुर्सी पर भी खतरा मडराने लगा। माना जा रहा है कि इसी का नतीजा है कि पुलिस ने आनन-फानन में बैजापुर हत्याकांड का गलत-सही खुलासा कर दिया। आरोपी धर्मेन्द्र की माँ सरस्वती के जरिये मुख्यमंत्री समेत अन्य को भेजे गये शिकायती पत्र के मुताबिक पुलिस ने पूंछतांछ के नाम पर धम्मौर थाने से जुड़े मामले में आरोपी धर्मेन्द्र यादव व उसके कुछ घंटे बाद उसकी सुपुर्दगी देने के बहाने उसके पिता भारत यादव को कोतवाली बुलवाया। इसी बीच यह बात सामने लाई गयी कि मनीषा के परिजनों ने सोशल मीडिया पर वायरल फोटो व वीडियो देखकर बैजापुर में मिली अज्ञात युवती के शव की शिनाख्त मनीषा के रूप में की है। जबकि अपनी लड़की गायब होने से स्वयं को परेशान बता रहे परिजनों के जरिये पड़ोस के ही थाने से शव बरामदगी होने के बाद भी 22 दिनों तक शिनाख्त की कोई बात सामने नही लाई गई और न ही पुलिस का ही कोई प्रयास दिखा । अपनी बातों को सही साबित करने के चक्कर मे पुलिस ने अपनी कस्टडी में अपने तरीके से लिये आरोपी धर्मेंद्र के बयान व कुछ अन्य सामान्य चीजो को पेश किया। पुलिस ने अपने खुलासे को सही साबित करने के लिए अपनी जान में अच्छी कहानी बनाई,लेकिन उस खुलासे में शुरू से ही कई छेद दिखने लगे। क्योकि लड़की के शव बरामदगी के दौरान सामने आई कई बातों से पुलिस के खुलासे की कहानी काफी उलट दिखी। जिसको लेकर शुरू से ही चर्चाएं होने लगी। लड़की के गायब होने से लेकर शव बरामदगी के बीच का अंतराल लगभग 70 दिन का रहा,लेकिन इस बीच लड़की और आरोपी के बीच किसी तरीके के सम्बन्ध होने व घटना स्थल पर मुल्जिमो की मौजूदगी होने सम्बन्धी कोई सबूत पुलिस नही दे पाई है,शिवाय मुल्जिमो व अपने बयान के,जिसकी कानून की नजर में कोई अहमियत ही नही। फिलहाल पुलिस की अपनी ढपली अपना राग, जैसे चाहे वैसे बजाये। पुलिस ने कभी सोचा भी नही था कि उनके खुलासे पर कोई उंगली भी उठाएगा। लेकिन हुआ वही जिसका पुलिस को डर था। आरोपी की माँ ने मनीषा के परिजनों के जरिये पुलिस के गुमराह करने अथवा दबाव में शव की फर्जी शिनाख्त भी करने का आरोप लगाया है। इस मामले में आरोपी धर्मेन्द्र यादव उसके पिता भारत यादव व रिश्तेदार कपिलदेव यादव को बीते तीन अक्टूबर को पुलिस ने जेल भेजने की कार्यवाही की। आरोपी की माँ के सवाल उठाने के अलावा सामान्य तौर पर भी पुलिस की पूरी कार्यशैली पर गौर किया जाये तो पूरा खुलासा ही सवालों के घेरे में है। शिकायतकर्ता सरस्वती का दावा है कि उसके बेटे धर्मेन्द्र के मुताबिक बैजापुर में मिली अज्ञात युवती की लाश मनीषा की है ही नहीं, बल्कि किसी दूसरे की लाश है। पुलिस पर दूसरे की लाश को गलत ढ़ंग से मनीषा की बताकर फर्जी खुलासा करने का आरोप लगा है। पुलिस के इस खुलासे पर सवाल उठने से यह माना जा रहा कि बैजापुर में मिली युवती से हैवानियत करने वाले असल दोषी अब भी कानून की पकड़ से दूर है और उस लड़की की पहचान पर भी पर्दा पड़ गया है। आरोपी धर्मेंद्र की मां सरस्वती ने बीते पांच अक्टूबर को मुख्यमंत्री समेत अन्य को पत्र भेजकर प्रकरण की निष्पक्ष तफ्तीश के लिए बरामद शव के अवशेष व मनीषा के माता पिता का आवश्यक नमूना लेकर डीएनए जांच कराये जाने की मांग की है। डीएनए जांच की मांग के बाद भी पुलिस के जरिये अभी कोई प्रतिक्रिया सामने नही लाई गई है,जिसको लेकर माना जा रहा कि कहीं न कहीं पुलिस को डर है कि कहीं डीएनए मैच न किया तो क्या होगा। सवाल उठता है कि अगर पुलिस को अपने खुलासे पर अटूट भरोसा है तो निष्पक्ष जांच के लिए आखिर क्यों डीएनए जांच कराने से परहेज कर रही है। फिलहाल मामला अब काफी बढ़ गया है तो पुलिस को डीएनए जांच के विषय मे जरूर ही कुछ सोचना पड़ेगा। वहीं दूसरी तरफ अब सरस्वती ने फर्जी खुलासा करने के आरोपों से घिरे जिले की पुलिस से निष्पक्ष विवेचना न होने का भी दावा करते हुए किसी अन्य स्वतंत्र जांच एजेंसी से मुकदमें की तफ्तीश कराने की मुख्यमंत्री व डीजीपी सहित अन्य से मांग की है। सरस्वती ने दूसरी युवती की लाश होने की दशा में असली मनीषा को अब पुलिस व अन्य से जान का खतरा होने की सम्भावना भी व्यक्त की है। इस मामले में दिनों-दिन पुलिस की कार्यशैली पर सवाल उठने से मामले से जुड़े पुलिस अधिकारियों की भूमिका पर प्रश्नचिन्ह लग गया है। मुख्यमंत्री के पास विवेचना हटाने की मांग को लेकर हुई शिकायत की जांच का जिम्मा मुख्यमंत्री के संयुक्त सचिव अरूण कुमार दूबे को मिली है।


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