ढाई दशक तक नियम विरुद्ध ढंग से चलती रही बकरमण्डी !

शहर क्षेत्र में सिर्फ नगर पालिका ही लगवा सकती है बकरी व मवेशी बाजार
राजस्व बढ़ाने के प्रति गम्भीर नहीं रही सरकारी मशीनरी
विवादों ने प्रायः बढ़ाई सिस्टम की मुश्किलें
53 शिकायते, 17 नोटिसें और 07 कार्यवाहियों के बावजूद चलता रहा मंडी संचालक का साम्राज्य
प्रमोद श्रीवास्तव
फतेहपुर।


राजस्व बढ़ाने के प्रति सरकार की सख्ती के बावजूद प्रशासनिक मशीनरी “उपलब्ध माकूल संसाधनों” के प्रति गम्भीर नहीं रही। नतीजतन 53 शिकायते, 17 नोटिसे और 07 कार्यवाहियों के बावजूद एक मंडी संचालक का साम्राज्य चलता रहा! सिस्टम ने कभी तत्कालीन डीएम गुलबीर सिंह के आदेश की नाफरमानी की तो कभी डा० प्रभात कुमार के स्पष्ट आदेश को ताक पर रखा। विवादों से गहरा ताल्लुक रखने वाले दबंगो पर प्रशासनिक कार्यवाई के बाद छटपटाहट उनकी आय का प्रमुख स्त्रोत समाप्त होने का संकेत है! फिलहाल बकरी मण्डी का संचालन रोकवाने में सफल रहे प्रशासन के भविष्य के रूख का हर किसी को बेसब्री से इंतजार है। क्या इस बार जिम्मेदारो को नीचा नहीं देखना पड़ेगा और ऊपर तक सिस्टम फिट होने का दावा करने वालो पर लगाम कस पायेगी यह यक्ष प्रश्न बना हुआ है?
उल्लेखनीय है कि बड़ी आय वाली बाजारों का प्रायः सरकारी राजस्व से वास्ता न के बराबर रहता है। फतेहपुर शहर में चार दशक से भी ज्यादा समय से संचालित “बकरी व मवेशी मण्डी” से 1994 के पहले तक तो कुछ हजार रुपये सालाना आय होती थी। उस समय तक मंडी संचालक बाकायदे नगर पालिका परिषद से सालाना लाइसेंस भी बनवाते थे किन्तु उसके बाद सालाना करोड़ों की आय वाली इन मण्डियों से सरकारी राजस्व के नाम पर एक धेला भी जमा नहीं हुआ। कितनी अजीबोगरीब बात है कि मोदी और योगी सरकार देश प्रदेश के सभी छोटे-बड़े व्यवसाइयो की हलक तक हाथ डालकर टैक्स की वसूली कर रही हैं किन्तु ऐसी मण्डियों के मोटे आसामियो से कम से कम फतेहपुर में लाइसेंस शुल्क तक न लिया जाना अपने आप में बड़ी विसंगति ही कही जायेगी। इस सवाल पर पालिका के जिम्मेदार तो असहज है ही, साथ ही प्रशासनिक जिम्मेदार भी जवाब देने से बचते नजर आते हैं। बगली झांकने लगते है!
गौरतलब है कि 1984 में सूबे की तत्कालीन श्रीपति मिश्रा सरकार ने नगर निगम/नगर पालिका के एक्ट में संशोधन करके इन इकाइयों की आय के स्त्रोंतो में परिवर्तन किया था जिसके तहत इन इकाइयों की सीमा में कैसा भी व्यवसाय, बाजार, दुकान आदि के लिए लाइसेंस व्यवस्था को अनिवार्य किया। बाद में यहाँ के तत्कालीन डीएम गुलबीर सिंह ने नगर पालिका को खासकर बकरी व मवेशी बाजार से बढ़ी दरो में टैक्स वसूली के आदेश भी दिये किन्तु इन बाजारों के संचालकों के प्रभाव व सिस्टम के चलते तत्कालीन बोर्ड/प्रशासक इसे लागू नहीं करवा पाया किन्तु फिर भी लाइसेंस व कर वसूली होती रही, जो सालाना कुछ हजार रुपये तक ही सीमित रही थी।
सूत्र बताते है कि 1994 में स्थानीय नगर पालिका में प्रशासक काल के दौरान तत्कालीन जिलाधिकारी डा० प्रभात कुमार ने नगर पालिका फतेहपुर की आय बढ़ाने के उद्देश्य से जब शहर के अन्दर नियम विरूद्ध ढंग से चल रही बकरी व मवेशी बाजार पर नजर डाली तो उनके भी होश तब उड़ गये जब पालिका के तत्कालीन ईओ आलोक कुमार मिश्रा ने इन बाजारों से “सालाना लाइसेंस व कर वसूली” कुछ एक हजार रुपये ही होने की जानकारी दी। साथ ही डीएम को वह शासनादेश भी दिखाया जिसमें प्रशासन को स्पष्ट दिशा निर्देश थे कि वैसे तो रिहायशी क्षेत्र में किसी प्रकार की मवेशी बाजार न लगने दिया जाये किन्तु अगर जरूरी हो तो नगर क्षेत्र में सिर्फ नगर पालिका को ही ऐसी बाजारें लगवाने की अनुमति दी जाये! इस शासनादेश पर तत्कालीन डीएम ने इन दोनो बाजारों को शहर से हटाने सम्बंधी कड़े आदेश जारी किये। वही नगर पालिका द्वारा लखनऊ रोड पर बाजार भी लगवाया जाना शुरू किया।
डा० कुमार के निर्देश पर पालिका ने ग्यारह सप्ताह तक सरकारी जमीन पर बाजार लगवाई और कुल 2.384 लाख रुपये का राजस्व भी वसूला किन्तु इसी बीच डा० कुमार का तबादला हो गया और फिर प्रशासनिक जिम्मेदारो ने इस मामले में गम्भीरता नहीं दिखाई और बकरी मंडी संचालक ने हाईकोर्ट से स्टे ले लिया। इसके बाद पालिका के चुनाव हुए और राजकुमारी लोधी के नेतृत्व में नया बोर्ड पदासीन हुआ, जिसने न तो स्वयं बकरी व मवेशी मण्डी लगवाई और न ही निजी तौर पर बकरी व मवेशी मण्डी के लिये कोई लाइसेंस ही जारी किया। यहाँ पर हैरत में डालने वाला तथ्य यह है कि जिस एक बाजार से पालिका को लगभग ढाई दशक पहले सिर्फ 11 सप्ताह में 2.384 लाख रुपये का राजस्व मिला था उस अकेले बकरी मण्डी से 1995 के बाद एक रुपये भी किसी प्रकार के टैक्स को नहीं वसूला जा सका, जबकि इन लगभग 24 वर्षों में टैक्स का पैमाना 10 गुना तक बढ़ गया है।
पालिका के एक पूर्व अधिवक्ता का मानना है कि शासनादेश के तहत चाहे छोटा पशु हो या बड़ा प्रत्येक पशु की बाकायदे गणना करके टैक्स वसूली का प्रावधान है! उस समय पालिका चेयरमैन रही राज कुमारी लोधी के बाद शब्बीर अहमद फिर लम्बा प्रशासक काल, उसके बाद अजय अवस्थी, उनके बाद चन्द्र प्रकाश वर्मा के कार्यकाल तक बकरी व मवेशी मण्डी के मामले पर किसी ने हाथ नहीं डाला। मौजूदा चेयरमैन नजाकत खातून के कार्यकाल में अवश्य इस दिशा में गम्भीरता देखने को तब मिली जब लगभग एक वर्ष पूर्व तत्कालीन डीएम आँजनेय कुमार सिंह ने बकरी बाजार को बाकरगंज क्षेत्र से हटवाने में सफलता प्राप्त की।
बताते चले कि पालिका प्रशासन व तत्कालीन डीएम की कूटनीति से बकरीमण्डी संचालक का कानूनी पक्ष काफी कमजोर हो गया है और पिछले दिनो हाईवे ऐक्ट में निहित व्यवस्था के दृष्टिगत बकरीमण्डी को नऊवाँबाग इलाके से भी हटा दिया गया। नगर पालिका परिषद के व्यवस्थापालक मानते है कि नियमानुसार इन बाजारों को पालिका को ही लगवाना चाहिये किन्तु पालिका क्यों नहीं लगवा पा रही है इसका जवाब किसी के पास नहीं है। पालिका के कर निरीक्षक राजू का कहना है कि पालिका फिलहाल लाइसेंस व्यवस्था के तहत जिन 39 मदों में वसूली कर रही है, उनमें बकरी व मवेशी मण्डी समेत आढ़त बाजार शामिल नहीं है। उन्होंने बकरी मण्डी के सवाल के बाबत बताया कि लगभग एक साल पहले डीएम के आदेश पर इसे बाकरगंज क्षेत्र से हटवाया गया था, जिसमें प्रशासन ने भी काफी मदद की थी, क्योंकि उसके एक दिन पहले उक्त मण्डी संचालक के गुर्गों ने बाजार हटवाने गये पालिका कर्मियों को दौड़ा लिया था जिससे कई कर्मी घायल भी हुए थे। उन्होंने कहा कि पालिका फिलहाल इन बाजारों से टैक्स वसूली नहीं करती किन्तु जिला प्रशासन व पालिका के अधिकारी आदेश देंगे तो लाइसेंस व्यवस्था के मदों में इन बाजारों को भी शामिल करने में कोई तकनीकी बाधा नहीं है।
एक अन्य जानकारी के अनुसार बाकरगंज व नऊवाँबाग इलाके से इन बाजारों को हटवाने का लगभग ढाई दशक में 13 बार प्रशासन ने प्रयास किया, इनसे सम्बंधित 53 शिकायतें हुई, 17 बार नोटिसे दी गई और 07 बार कानूनी कार्यवाई भी हुई! बावजूद इसके मण्डी संचालक आज भी प्रशासन को आँखे तरेर रहे हैं! जनकारो की माने तो अगर 1995 से अब तक टैक्स की नियमित वसूली होती तो पालिका को करोड़ों रुपया राजस्व मिलता। उधर इस सम्बंध में प्रशासनिक जिम्मेदार कहते है कि पालिका की आय बढ़ाने के लिये हर सम्भव प्रयास किये जायेंगे और किसी को भी व्यवस्था से खिलवाड़ नहीं करने दिया जायेगा। बाईपास क्षेत्र में एक अन्य बकरी बाजार लगने के सवाल पर कहा कि किसी भी मामले में नियमो से खिलवाड़ नहीं करने दिया जायेगा।


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