सबसे प्यारी प्रिया

प्रिया एक बुद्धिमान और समझदार बालिका थी। अपने माता-पिता की इकलौती बेटी होने के कारण उसे सदैव खूब लाड़-प्यार मिलता था। खेल और पढ़ाई में प्रिया की खास रुचि थी। उसका परिवार एक छोटा परिवार था, जिसमें वह अपने मां और पिताजी के साथ रहती थी। प्रिया पापा के साथ बैठकर पढ़ती तो खेल में उसकी मां उसके साथ रहती। अपने जीवन में इतनी सब खूबियों के बावजूद प्रिया को एक बात सदा अखरतीथी, वह यह कि जब कभी उसके घर पर कोई मेहमान आ जाता तब पता नहीं घर को किसकी नजर लग जाती। जितने दिन घर पर मेहमान होते उन दिनों प्रिया को न तो माता-पिता का पहले जैसा लाड़-दुलार ही मिलता और न ही उसकी सभी बातों को ध्यान से ही सुना जाता। प्रिया को मेहमानों का आना तो अच्छा लगता किंतु उन दिनों अपने माता-पिता से मिल रहे प्यार-दुलार में जो कमी आ जाती थी वह उसे पसंद न थी। प्रिया घर के दरवाजे पर खड़ी अपनी मम्मी के आने का इंतजार कर रही थी तभी उसे उसके नानाजी घर आते हुए दिखाई दिए। नानाजी को देखते ही प्रिया के मन में आया कि शायद अब फिर कुछ दिन उसे मम्मी-पापा के लाड़ से वंचित रहना पड़ सकता था। नानाजी ने प्रिया को देखते ही अपने पास बुलाया और हैलो बेटे कहकर बड़े प्यार से उसे गले लगाया और ढेर सारे खिलौने व टॉफियां उसे दीं। नानाजी का प्यार देखकर प्रिया के मन में कई सवाल उठे। उसने सोचा कि नानाजी या कोई भी घर आया मेहमान उसके साथ इतना दोस्ताना रहता है फिर भी वह उनके आने पर इतना अकेलापन क्यों महसूस करती है। प्रिया ने मन ही मन उन सब बातों पर विचार किया, जिनके कारण वह दुःखी होती थी। प्रिया ने नोटिस किया कि मेहमान के आने पर मम्मी-पापा को अपने काम के अलावा मेहमान के लिए भी समय निकालना पड़ता था और इसी वजह से वे उस पर ज्यादा ध्यान नहीं दे पाते थे। प्रिया को समझ आ रहा था कि उसके मम्मी-पापा तो हमेशा ही उसे चाहते हैं। प्रिया बुद्धिमान तो थी ही जैसे ही पूरी बात उसकी समझ में आई उसने चुटकियों में इस समस्या का हल खोज निकाला। प्रिया जो पहले मेहमानों के घर आने पर भी अपने मम्मी-पापा को अपने साथ व्यस्त रखना चाहती थी, अब की बार उसने नानाजी के आने पर न सिर्फ मां के साथ घर के काम में हाथ बंटाया बल्कि नानाजी को भी अपने पास बैठाकर उनसे पढ़ाई और खेल की बातें कर उनका और अपना समय पास किया। प्रिया ने पाया कि नानाजी बुजुर्ग जरूर थे पर उनके पास ज्ञान का अथाह भंडार था और खेल में तो वे बच्चों के जैसे एक्टिव थे। अब की बार मेहमान के आने पर प्रिया को जहां नया साथी मिला वहीं उसके खेल और पढ़ाई में भी नयापन आया। प्रिया बहुत खुश थी अब जब भी उसके घर मेहमान आते वह मम्मी-पापा की जगह उनके साथ खेलती, पढ़ती व उनके देश-दुनिया की विशेषताओं से कुछ सीखने की कोशिश करती। इस तरह अब प्रिया के घर आए मेहमान का और प्रिया का समय खूब पास होता और दुनिया की नई-नई जानकारियां भी आपस में शेयर होतीं।


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