बाल विवाह रुकवाने की सफल कहानी

देश व समाज में प्रचलित कुरीतियां एवं भेदभाव जैसे कन्या भ्रूण हत्या, असमान लिंगानुपात, बाल विवाह एवं बालिकाओं कूे प्रति परिवार की नकारात्मक सोच जैसी प्रतिकूलताओं के कारण प्रायः बालिकायें/ महिलायें अपने जीवन संरक्षण, स्वास्थ्य एवं शिक्षा जैसे मौलिक अधिकारों से वंचित रह जाती है। इस सामाजिक कुरितियों को दूर करने के लिये सरकारी-गैर सरकारी स्तर से प्रयास बराबर किये जा रहे हैं। जो बहुत ही आवश्यक है। राज्य सरकार द्वारा बालिकाओं एवं महिलाओं को सामाजिक सुरक्षा के साथ-साथ उनके लिये कानून व्यवस्था के तहत न्याय दिलाया जा रहा है। जिसके तहत बाल विवाह रूकवा कर सुकन्या को रूढ़ीवादिता से मुक्ती दिलायी गयी।
उत्तर प्रदेश सरकार के अथक प्रयास के तहत एक बालिका सारिका के फूफा व रामचंद्र व उनके मित्र दिलीप शंकरलाल ने एक लिखित प्रार्थना पत्र के साथ बालिका के हाईस्कूल के रजिस्ट्रेशन लिस्ट संलग्न कर 181 आशा ज्योति केंद्र उन्नाव के कार्यालय में आए और 181-आशा ज्योति केंद्र उन्नाव के सुगमकर्ता को जानकारी एवं लिखित पत्र दिया। बाल विवाह के संबंध में जिला प्रोबेशन अधिकारी उन्नाव के संज्ञान में लाया गया, संज्ञान में आते ही जिला प्रोबेशन अधिकारी उन्नाव ने बाल विवाह रुकवाने हेतु एवं आवश्यक कार्यवाही करने का आदेश दिया। तद्ोपरान्त संरक्षण अधिकारी, सुगमकर्ता व सामाजिक कार्यकर्ता के साथ टीम बांगरमऊ पहुंची और सम्बन्धित थानाध्यक्ष को पूरी जानकारी देने के बाद टीम उस गांव के क्षेत्राधिकार के अंतर्गत आने वाली गंजमुरादाबाद चैकी के इन्चार्ज व कांस्टेबल को साथ लेकर टीम बालिका के घर ग्राम सुल्तानपुर पहुंची  और वहां देखा गया कि शादी की तैयारियां चल रही है। बालिका सारिका व उसके माता से बातचीत की गई और बालिका के जन्मतिथि प्रमाण पत्र के रूप में हाईस्कूल की मार्कशीट मांगी गई तो बताया कि हाईस्कूल का रिजल्ट अभी नहीं आया है और परीक्षा का प्रवेश पत्र दिखाया जिसमें बालिका की जन्म तिथि प्रवेश पत्र पर 6 मई 2002 अंकित थी जिससे स्पष्ट हो गया कि बालिका की उम्र 18 वर्ष से कम है। तब टीम द्वारा शादी करने से मना किया गया तब बालिका व उसकी माता दोनो यह कहते हुये कि मेरे पिता का देहान्त हो गया है और कोई भी परिवार का सदस्य सहयोग करने वाला नहीं है। इसलिये शादी करने दिया जाए और शादी करने की जिद पर अड़े रहें तब टीम बालिका और माता तथा उसके परिवार के सदस्यों को बांगरमऊ थाने लाया गया तभी कुछ ही देर में लड़का पक्ष के पिता महिपालपुर पुत्र सुंदरलाल ग्राम सुआपुर थाना माधवगंज जिला हरदोई भी बांगरमऊ थाने में उपस्थित हो गये जहां दोनों पक्षों से बातचीत करके उनकी काउंसलिंग की गई और उन्हें समझाया गया कि बालिका व बालक के बालिग होने से पहले विवाह करना कानूनी जुर्म है तथा बाल विवाह एक्ट के अंतर्गत दिये जाने वाले दण्ड व सजा के बारे में भी विस्तृत जानकारी दी गई और बालिका को थानाध्यक्ष द्वारा ग्राम प्रधान की सुपुर्दगी में दिया गया और निर्देशित किया गया कि दोनों बालक व बालिका कानून बालिग होने पर ही शादी करें तथा दोनों पक्ष को दूसरे दिन अपने परिवार के साथ बाल कल्याण समिति में पेश होने का भी निर्देश दिया गया। जिसपर दोनो परिवार के सदस्यों ने  शादी न करने व समिति के समक्ष उपस्थित होने की सहमति जताई।


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