‘मुदित मन वाले मोदी’

नरेन्द्र सिंह राणा
छोटे मन से कोई बड़ा नहीं होता और टूटे मन से कोई खड़ा नहीं होता यह बात भारत के पूर्व प्रधानमंत्री भाजपा के संस्थापक अटल बिहारी बाजपेयी ने अपनी कविता में कहीं है। वह नायक है। अभिभावक है। मन की बात करते हैं। मुदित मन वाले है भारत के यशस्वी प्रधानमंत्री मोदी जी। भारत की संसद में अपने कर्मों के कारण सिमट चुका विपक्ष हो हल्ला कर रहा था मोदी जी को आना चाहिए सदन में बयान देना चाहिए। हम विदेश मंत्री के बयान से संतुष्ट नहीं है। 
बताते चलें कि अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने एक सफेद झूठ बोला कि भारत के प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने उनसे काश्मीर मुद्दे पर मध्यस्ता करने की बात कही है। पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान खान से भेंट के वक्त उन्होने ऐसा कहा। भारत सरकार की ओर से तुरन्त विदेश मंत्रालय के सचिव ने इसका खण्डन कर दिया। कांग्रेस पार्टी तो मानों अंधे के हाथ बटेर लग गया वाली कहावत पर उतर पड़ी। देश के साथ धोखा किया गया आदि आदि। क्योंकि संसद चल रही है तो वहां भी इस मुद्दे पर अखाड़ा बनाने में लग गए। भारत सरकार के विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने सदन में स्पष्ट कर दिया कि प्रधानमंत्री मोदी जी ने अमेरिका राष्ट्रपति से ऐसी कोई चर्चा तक नहीं की। क्योंकि विदेश मंत्री जी उस भारत तथा अमेरिका राष्ट्रपति की वार्ता के समय साथ-साथ थे अतः उन्होंने सच बता दिया कि भारत के प्रधानमंत्री जी ने ऐसी कोई पेशकश नहीं की थी। उसी दिन प्रधानमंत्री ने अपने साथ एक छोटे बच्चे को गोदी में खिलाते हुए, स्वयं उसके साथ खेलते हुए, दुलारते हुए फोटो पोस्ट कर दी। मोदी जी बेहद खुश्नुमा लग रहे थे फोटो पोस्ट में। मोदी जी ने फोटो साझा करते हुए लिखा'' आज संसद में मुझसे मिलने के लिए एक बेहदखास दोस्त आया है। मोदी जी ने हल्के-फुल्के अंदाज में बच्चे को दुलारते हुए कहा कि बडे़ होकर सांसद बनना और अपने दादा की तरह दिल्ली आना। पोस्ट को कई करोड़ लाइक मिल चुके है। वैसे भी नरेन्द्र भाई मन वचन व कर्म से अपनी राष्ट्र भगती के कारण देश में परम आदरणीय माने जाते है। वह अपनी मौज में रहते है। अपने काम में मस्त रहते है। प्रधानमंत्री मोदी जी अपने हर कार्य से संदेश देते है राष्ट्रवासियों को। मोदी जी का महामंत्र है ''कर्म'' परहित में अपने को फना कर दिया है नरेन्द्र भाई ने। रामचरित्रमानस के रचयिता पूज्य गुरूदेव गौस्वामी तुलसीदास जी माहराज चैपाई के माध्यम से सर्व समाज को बताते है'' परहित सरिस जिनके मन माही-तिन्ह कहु जग कछु दुलर्भ नाहीं यानि संसार में किसी भी देश-काल परिस्थिति में जिसके मन में परहित है तो जगत में उसके लिए कुछ भी दुर्लभ नहीं है। हर परिस्थिति में दूसरों के लिए, समर्पित जीवन जीने वाला निर्भिक-साहसी व अविचलित रहता है। 2014 में मोदी जी जब देश के प्रधानमंत्री बने तब उन्होंने राष्ट्रहित में एक कड़ा व बड़ा निर्णय किया था वह था ''नोटबंदी''। लगभग सभी विपक्षी दलों ने एक साथ इस निर्णय के खिलाफ मोर्चा खोल दिया था। इस निर्णय को देश विरोधी, गरीब, किसान विरोधी, बताते हुए बड़े आन्दोलन की धमकी दी कि यदि यह निर्णय वापस नहीं हुआ तो वे ईट से ईट बजा डालेंगें। 3-4 दिन की उनकी बयानबाजी पर जनता ने जिरो रिसपोन्स दिया। बंगाल की मुख्यमंत्री सुश्री ममता बनर्जी, यूपी के पूर्व मुख्यमंत्री जो उस समय मुख्यमंत्री थे अखिलेश यादव व दिल्ली के मुख्यमंत्री केजरीवाल ने अपने प्रदेशों में आन्दोलन करने का पूरा प्रयास किया परन्तु सभी को मोदी जी के इस निर्णय के खिलाफ मुंह की खानी पड़ी। मुरादाबाद की एक जनसभा में नरेन्द्र भाई ने अपनी चिरपरिचित शैली में सभी का एक साथ जवाब देते हुए कहा था कि उनका यह निर्णय भारत के लिए अति आवश्यक था मैंने इसीलिए यह कड़ा कदम उठाया है और अगर मेरी व्यक्तिगत बात विपक्ष  करता है तो मैं तो ''फकीर'' हूॅ झोला उठाऊगां और चल दूंगा। मेरे पास न परिवार न सम्पत्ति है अपना अपना सोचों तुम्हार क्या होगा। निजि तौर पर मोदी जी इस अंदाज में हमेशा रहते है। 2019 में जनता ने भारी जनसमर्थन से उनकी दोबारा ताजपोशी की तब एनडीए के सहयोगियों व सांसदों को सम्बोधित करते हुए उन्होंने कहा था कि ''मेरे शरीर का एक-एक कण-मेरे समय का एक-एक क्षण मेरे देश के लिए खर्च करूगां अपने लिए कुछ नहीं करूंगा। क्या आज भारत का कोई भी किसी भी पार्टी का नेता हो वह यह सब कह सकता है यदि कह भी दे तो क्या जनता उस पर विश्वास करेगी एकदम नहीं क्योंकि कोई परिवारवादी है, कोई वंशवादी है, जातिवादी है, कोई क्षेत्रवादी है व तुष्टिकरणवादी है। नरेन्द्र भाई अपने सम्बोधन में हमेशा प्रेरणादायी विचार ही व्यक्त करते है। विरोध दल के नेताओं को तो कुछ न कुछ खोट निकालाना है तो वे कहा चुकते है। यद्यपि जब कोई किसी की बराबरी नहीं कर पाता तो उसको गलत अपने को सही बताता ही है। श्रीरामचरित्रमानस में पूज्य गुरूदेव जब ग्रंथ की रचना प्रारम्भ करते है तो सभी की वंदना करते है उसमें दुष्टों की वंदना भी करते है। गौस्वामी जी चैपाई लिखते है। ''मैं अपनी दिस किन निहोरा-ते निज और न लायब भोरा- बायस पालऊह अति अनुरागा-कबहु निरामिश होई की कागा ''अर्थात जैसे कऊवे को अत्यंत प्रेम के साथ पालिये कुछ भी खिलाईये परन्तु वह कभी मांसाहार को नहीं छोड़ता है। उसी प्रकार तुलसीदास जी बताते है कि आप अपने विरोधियों से कभी भी अपने हित करने के बारे में न सोचें परन्तु अपना परहित धर्म करते रहना है। गुरूदेव कहते है कऊवा कभी कोयल की मीठी बोली की सराहना नहीं करता क्योंकि उसकी बोली तो काऊ-काऊ है। ऐसे ही बगुले कभी हंस की प्रशंसा नहीं करते। भारत के वर्तमान विपक्षी दलों का भी यही कऊवे व बगुले वाला हाल है। प्रधानमंत्री नरेन्द्र भाई की उनके श्रेष्ठ कार्यो के कारण विदेश में जो सम्मान मिल रहा है वो आजतक भारत के किसी भी प्रधानमंत्री को नहीं मिला। सयुक्त राष्ट्र संघ ने पर्यावरण संरक्षण के कारण उनकों ''चैम्मियन आफ द अर्थ का एवार्ड देता है। दक्षिण कोरिया, फिलिपिन्श यू0ए0ई0 व फ्रांस तथा ईजराइल अपने देश के सर्वोच्च सम्मान से नवाजते है। दुनिया में भारत का डंका बज रहा है और यहां विपक्षी रो रहे है। राफेल  विमान खरीद पर देशभर में महाभारत हुआ विरोधी विशेष रूप से कांग्रेस पार्टी के अध्यक्ष राहुल गांधी ने तो सलोगन ही बना डाला था चैकीदार -- है क्या हसर हुआ उनका उनकी नानी याद आ गई। इस प्रकार की राजनीति कभी भी राष्ट्रहित में नहीं कही जा सकती है। आधारहिन आरोप लगाने के कारण राहुल गांधी को देश के सर्वोच्च न्यायालय से माफी मांगनी पड़ी। आज के ऐसे नेताओं से जहां राष्ट्र का अहित हो रहा है वही वे जाने अनजाने अपने पैरों पर कुल्हाड़ी मारने का काम भी कर रहे है। देश की चिंता करने वाले तो अन्य नेता मौजूद है आगे भी रहेंगे लेकिन तुम्हारा क्या होगा यह जरूर ख्याल रखना चाहिए। हमारे देश में सभी के कल्याण की बात होती है। होना भी चाहिए परन्तु कोई गधे और गाय में फर्क न समझें तो इसमें देशवासियों का क्या कसूर। राफेल विमान खरीद पर फ्रंस के राष्ट्रपति का स्पष्टीकरण आ गया कि यह दोनों देशों के बीच की डील है इसमें कोई बिचैलिया शामिल नहीं है। सर्वोच्च न्यायालय ने सुनवाई के बाद निर्णय दे दिया कि खरीददारी मानकों के अनुरूप हुई है। सीएजी ने कह दिया कि कोई कमी नहीं पाई गई फिर भी चिल्लाते रहे तो फजीहत तो होनी ही थी। अब काश्मीर पर डोनाल्ड टं्रप का यह झूठ अमेरिका के प्रमुख समाचार पत्रां ने एक और झूठ कहकर छापा। अब अमेरिका राष्ट्रपति को अपनों ने घेर लिया है। अमेरिकी सांसद ब्रैड शरमन ने ट्वीट किया यह ट्रंप की अटपटी व बचकानी गलती है। अमेरिका के अनुसार एक दिन में टं्रप औसतन 17 झूठ बोलते है। ट्रंप का झूठ सामने आने के बाद दुनिया भर में अमेरिका की किरकीरी हो रही है। भारत के विपक्षी दलों को यह याद रखना चाहिए कि झूठ के पांव नहीं होते है झूठ का साहरा लेकर पड़ाव तक तो शायद पहुंचा जा सकता है परन्तु मंजिल तक तो सत्य के साथ ही पहुंचा जाता है।


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