अब अपराध के पीड़ित/आश्रित भी क्षतिपूर्ति के होंगें हकदार : जिला जज

गोण्डा।


उत्तर प्रदेश पीड़ित क्षतिपूर्ति योजना-2014 के अन्तर्गत अब अपराध के पीड़ित अथवा आश्रित भी क्षतिपूर्ति के हकदार होंगें। जिला जज/जिला विधिक सेवा प्राधिकरण के अध्यक्ष राघवेन्द्र ने बताया कि ऐसे व्यक्ति जिसे अपराध में क्षति/हानि हुई है अथवा पीड़ित के परिवार वाले/आश्रितों को इस योजना का लाभ मिलेगा।
जनपद न्यायाधीश ने पात्रता के बारे में जानकारी देते हुए बताया कि जब अपराधी की शिनाख्त हो या न हो, परन्तु पीड़ित की शिनाख्त है और जब पीड़ित/दावेदार द्वारा अपराध की रिपोर्ट 48 घण्टे के भीतर थानाध्यक्ष/वरिष्ठ पुलिस अधिकारी/कार्यकारी अथवा न्यायिक मजिस्ट्रेट से की गयी हो, (रिपोर्ट करने में हुए बिलम्ब को उचित कारणों के आधार पर क्षमा भी किया जा सकता है।) तथा जब पीड़ित/दावेदार ने अन्वेषण और विचारण में पुलिस एवं अभियोजन का सहयोग किया गया हो, वे ही इस योजना के पात्र लाभार्थी होगें। उन्होंने बताया कि क्षतिपूर्ति के लिए प्रार्थना पत्र पीड़ित अथवा उसके आश्रित द्वारा सम्बन्धित न्यायालय अथवा जिले के दीवानी न्यायालय परिसर में स्थित जिला विधिक सेवा प्राधिकरण के कार्यालय में देना होगा।
पीड़ितों को दी जाने वाली अन्तरिम सहायता के बारे में उन्होंने बताया कि अपराध की संवेदनशीलता एवं पीड़ित को विशेष आवश्यकता के आधार पर 25 हजार रूपए से एक लाख रूपये तक की अन्तरिम सहायता, विशिष्ट उपचार एवं देखभाल के लिए दी जा सकती है। इसके अतिरिक्त पीड़ित को जिला विधिक सेवा प्राधिकरण के आदेश पर थानाध्यक्ष अथवा क्षेत्र के मजिस्ट्रेट के द्वारा जारी प्रमाण-पत्र पर पीड़ित को मुफ्त चिकित्सा  उपलब्ध करायी जायेगी। जिलाधिकारी तथा पुलिस अधीक्षक भी पीड़ित/पीड़िता को जिला शासकीय अधिवक्ता(क्रिमिनल) ज्येष्ठ अभियोजन अधिकारी के माध्यम से जिला विधिक सेवा प्राधिकरण को आवेदन पत्र देने हेतु निर्देश दे सकते हैं।
अपराध के पीड़ित/आश्रित को देय क्षतिपूर्ति के अन्तर्गत बलात्कार पीड़ित को 03 लाख रूपए, मानसिक संताप के कारण हुई हानि या क्षति (भा0दं0वि0 की धारा 325, 326, 333, 394, 429, एवं 436)  में 01 लाख रूपए, संक्षारक पदार्थ अर्थात तेजाब आदि हमले से पीड़ित को 5लाख रूपए, मृत्यु (गैर कमाने वाला सदस्य) की दशा में डेढ़ लाख रूपए, मृत्यु (कमाने वाला सदस्य) की दशा में 02 लाख रूपए, मानव तस्करी से पीड़ित को 02 लाख रूपए, लैंगिक अपराधों से बालकों का संरक्षण अधिनियम 2012 की धारा 4,6,7,9,11 और 14 के अधीन अपराध पीड़ित को 02 लाख रूपए इसके साथ ही प्रवेशन लैंगिक हमला (धारा-4) पीड़ित को 02 लाख रूपए, गुरूत्तर प्रवेशन लैंगिक हमला (धारा-6) पीड़ित को 02 लाख रूपए, लैंगिक हमला (धारा-7) को 01 लाख रूपए, गुरूत्तर लैंगिक हमला (धारा-9) पीड़ित को डेढ़ लाख रूपए, लैंगिक उत्पीड़न (धारा-11) पीड़ित को 01 लाख रूपए, अश्लील प्रयोजनां के लिए बालक का उपयोग (धारा-14) पीड़ित को 01 लाख रूपए, जलने पर शरीर का 25 प्रतिशत से अधिक का प्रभावित होना (तेजाब हमला के मामलों के अतिरिक्त) पीड़ित को 02 लाख रूपए, यौन उत्पीड़न (बलात्कार के अतिरिक्त) 50हजार रूपए, गर्भ की क्षति पर पीड़ित को 50 हजार रूपए, गर्भधारण क्षमता की क्षति पर पीड़ित को डेढ़ लाख रूपए, पूर्ण विकलांगता (80 प्रतिशत या अधिक) पीड़ित को 02 लाख रूपए, आंशिक विकलांगता (40 प्रतिशत से 80 प्रतिशत) वाले पीड़ित को 01 लाख रूपए, क्रास बार्डर फाइटिंग से पीड़ित महिला जिसमें मृत्यु अथवा स्थायी विकलांगता (80 प्रतिशत या अधिक)हो, के पीड़ित को 02 लाख रूपए तथा आंशिक विकलांगता (40 प्रतिशत से 80 प्रतिशत) वाले पीड़ित को 01 लाख रूपए की आर्थिक सहायता दी जाएगी।


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