कैंसर पीड़ितों के कल्याण का महान दिवस - 22 सितम्बर

प्रदीप कुमार सिंह  
मेरी साहसी बेटी 35 वर्षीय शान्ति पाल 'प्रीति' का ब्लड कैंसर से देहान्त 20 मार्च 2018 को हो गया था उस बहादुर बेटी को याद करते हुए हम विश्व के सभी कैंसर पीड़ितों के कल्याण की ईश्वर से सदैव प्रार्थना करते हैं! बेटी शान्ति पाल 'प्रीति' तुम हम सभी की समाज सेवा की सबसे बड़ी प्रेरणा हो तथा भविष्य में सदा-सदा रहोगी। जहां तक बेटी का कैंसर रोग से पीड़ित होने का कारण उसकी रोग प्रतिशोधक क्षमता का कमजोर होना था। जिन बच्चों को जन्म के पूर्व तथा बाद में पोषक तत्वों की पूर्ति ठीक से नहीं होती है ऐसे बच्चों की रोगों से लड़ने की क्षमता कमजोर रहती है। अर्थात वे कुपोषण का शिकार हो जाते है।
बेटी का पूरे एक वर्ष पी0जी0आई0, लखनऊ में इलाज चला। वह पूरे साहस के साथ कैंसर से लड़ती रही लेकिन वह बहादुरी से लड़ते हुए सदैव के लिए हमारे दिलां में अमर हो गयी। जिस प्रकार एक बहादुर सैनिक सीमा पर लड़ते हुए शहीद हो जाता है उसी प्रकार मेरी बेटी कलम की सिपाही की तरह विश्व एकता तथा विश्व शान्ति की स्थापना के लिए युद्धरत थी। वर्तमान में विश्व की सबसे बड़ी समस्या परमाणु शस्त्रों की होड़, ग्लोबल वार्मिंग, गरीबी, आतंकवाद तथा संकुचित राष्ट्रीयता है। इस कारण से विश्व का काफी धन तथा मानव संसाधन इन समस्याओं से निपटने में लगा हुआ है। यदि इस धन तथा मानव संसाधन को मानव निर्मित युद्धों तथा आतंकवाद से बचाकर सही दिशा में लगाया जा सके तो हम विश्व के प्रत्येक नागरिक के लिए रोटी, कपड़ा, मकान, स्वास्थ्य, शिक्षा तथा सुरक्षा की सर्वश्रेष्ठ व्यवस्था करने में समक्ष होंगे।    
इस लेख तथा इसके साथ संलग्न इमेज को जनहित में प्रकाशन हेतु भेजने का मुख्य उद्देश्य कैंसर जैसी बीमारी से लड़ने के लिए पीड़ितों को कुछ सरकारी तथा निजी संस्थानों की उपयोगी जानकारियों से सभी को अवगत कराना है। इसके साथ ही मेरी सभी से अपील है कि हम सभी मिलकर ऐसे जनमत तैयार करें जिसके फलस्वरूप एक युद्धरहित तथा आंतकवादरहित एक एकताबद्ध विश्व का गठन हो। विश्व के सभी लोगों को मिलकर वैश्विक लोकतांत्रिक व्यवस्था के गठन के लिए यथा शक्ति योगदान देना चाहिए। हमारा उद्देश्य जानलेवा रोग होने पर बेहतर मेडिकल सुविधायें उपलब्ध कराना ही नहीं होना चाहिए वरन् ऐसा वातावरण पहले से उपलब्ध कराना चाहिए ताकि विश्व के किसी व्यक्ति को कैंसर जैसी जानलेवा बीमारी के कारण अनमोल मनुष्य जीवन के मिले सुअवसर से वंचित न होना पड़े।
भारत सरकार ने विशेषकर गरीब लोगों के लिए आयुष्मान स्वास्थ्य योजना, प्रधानमंत्री राष्ट्रीय राहत कोष, स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय की राष्ट्रीय आरोग्य निधि का गठन किया है। इसका उद्देश्य गरीबी रेखा से नीचे जीवनयापन करने वाले ऐसे रोगियों को वित्तीय सहायता देना है जो जानलेवा बीमारियों से पीड़ित हैं। ताकि वे सरकारी तथा निजी अस्पतालों में बेहतर इलाजों की
सुविधा का निःशुल्क लाभ उठा सकें।
गुजरात में गिरिविहार कामधेनु ट्रस्ट एक गैर-लाभकारी संस्था है जो कई सामाजिक विकासात्मक कार्य कर रही है। आर.एम.डी. कैंसर अस्पताल इस संस्था का एक हिस्सा है। इस कैंसर अस्पताल में कैंसर प्राकृतिक तरीके से ठीक किया जाता है और मरीज से किसी प्रकार का कोई शुल्क नहीं लिया जाता है। वलसाड के पास राष्ट्रीय राजमार्ग 8 पर वाघलधारा गाँव में स्थित है। यूट्यूब में इसके बारे में और अधिक जानकारी ली जा सकती है।
कैंसर होने के कारण के कुछ कारण इस प्रकार हैं - तंबाकू का इस्तेमाल, अत्यधिक वजन, कम सब्जी और फल खाना, कम या बिल्कुल भी शारीरिक क्रियाएँ नहीं करना। इसके अलावा शराब का इस्तेमाल, एचआईवी संक्रमण, शहरी क्षेत्रों के वायु प्रदूषण, घर के अंदर धुम्रपान, अनुवांशिक खतरा, अत्यधिक धूप में रहना आदि। ह्यूमन पेपिलोमा वायरस और हेपेटाईटिस बी के अलावा टीकाकरण के तरीकों के बारे में भी लोगों को जागरूक किया जाना चाहिए। आम लोगों में कैंसर से संबंधित विभिन्न प्रकार के सामाजिक मिथक हैं जैसे कि कैंसर पीड़ित के साथ रहने या स्पर्श से उन्हें भी ये घातक बीमारी हो सकती है। इस तरह के मिथक को खत्म करने के लिये भी प्रयास होने चाहिए।
आम व्यक्ति को कैंसर पीड़ितों से अत्यधिक सहानुभूति या अपनी असफलता की कहानियों को बाँटने से बचना चाहिये क्योंकि ये उनके दर्द और डर उनके लिये असहनीय बन सकता है। उनकी यात्रा को आसान और खुशहाल बनाने या कैंसर को हराने के लिये तथा उनका मनोबल बढ़ाने, ऊर्जावान महसूस कराने और आत्म विश्वास देने के लिये उन्हें कुछ सकारात्मक सच्ची कहानियाँ सुनानी चाहिये। कुछ लोगों का मानना है कि कैंसर धनवान और उम्रदराज लोगों की बीमारी है जबकि ये एक वैश्विक और संक्रामक रोग है जो सभी उम्र के लोगों को हो सकता है। आमजन को लगता है कि कैंसर से पीड़ित होना मतलब ये एक सजा के समान है लेकिन अब ज्यादातर कैंसर उपचार योग्य हैं।
हर सेलेब्रिटी अपने आप में खास होता है लेकिन वे लोग जो जिंदगी की परेशानियों से जंग लड़कर अपने आप को साबित कर पाते हैं वह काबिले तारीफ होते हैं। जो अपने शरीर के आगे झुकते नहीं बल्कि उस पर जीत हासिल करते हैं। कुछ ऐसे ही सेलेब्रिटीयों के बारे में हम जानेंगे जिन्होंने कैंसर जैसी बीमारी को अपने ऊपर हावी नहीं होने दिया और इस जंग में विजयी हुए अथवा बहादुरी के साथ इस जंग को अन्तिम समय लड़ते हुए लोगों के दिलों में अमर हो गये।
गोवा के सबसे लोकप्रिय तत्कालीन मुख्यमंत्री मनोहर पर्रिकर का कैंसर के कारण कम आयु में ही निधन हो गया था। वे लंबे समय से कैंसर से जूझ रहे थे। उन्होंने जानलेवा बीमारी के दौरान भी अपने मुख्यमंत्री के दायित्व को निभाकर अनुकरणीय मिसाल समाज के सामने प्रस्तुत की है। इस महान आत्मा के समाज सेवा के जज्बे को हम नमन करते हैं।
भारतीय क्रिकेट टीम के शानदार प्लेयर युवराज सिंह भी कैंसर से पीड़ित हो चुके हैं। साल 2011 के क्रिकेट वर्ल्ड कप के दौरान ही युवराज की तबीयत बिगड़ने लगी थी। उन्हें सांस लेने में दिक्कत होने लगी थी। चेक अप कराने पर पता चला कि उन्हें फेफड़ों में कैंसर है। एक साल तक अमेरिका में उनका इलाज चला और 2012 में वह दोबारा एक बहादुर विजेता के रूप में क्रिकेट जगत में लौट आए।
नर्गिस दत्त 40 और 50 के दशक से एक विख्यात भारतीय अभिनेत्री थीं। वह न केवल हिंदी सिनेमा उद्योग की एक सफल अग्रणी महिला थी बल्कि महान अभिनेता सुनील दत्त की पत्नी भी थीं। उन्होंने अपने बेटे संजय दत्त की पहली फिल्म राकी से एक सप्ताह पहले कैंसर के साथ अपनी लड़ाई में अपने जीवन को खो दिया था।
राजेश खन्ना 60 के दशक से एक महान भारतीय अभिनेता थे। वह लंबे समय से भारतीय फिल्मों की शीर्ष स्थिति में रहे थे। वह पहले हिन्दी सिनेमा के सुपर स्टार थे। उन्हें वर्ष 2011 में कैंसर के बारे में पता चला। वह एक साल तक केमोथेरेपी के अधीन थे। एक साल तक इस जानलेवा बीमारी से जुझते हुए उनका वर्ष 2012 में देहान्त हो गया। यह महान कलाकार अपनी मनमोहक प्रतिभा से लोगों के दिलों में सदैव जीवित रहेगा।
फिल्म स्टार फिरोज खान की मौत भी कैंसर की वजह से हुई। साल 2008 में कैंसर से लड़ते-लड़ते बैंगलोर में इस एक्टर ने दुनिया से अलविदा कह दिया था। राकेश रोशन भी कैंसर की जंग लड़ते हुए संसार से सदैव के लिए विदा हो गये। बारबरा मोरी कैंसर जैसी बीमारियों से पीड़ित बालीवुड अभिनेत्री में से एक है। वह वर्ष 2010 में ऋतिक रोशन के साथ फिल्म काइट्स में देखी गई थीं। सौभाग्य से उनका कैंसर और इलाज के बहुत शरूआती चरण में था। उन्होंने कुछ दिनों तक पूरे साहस के साथ अपना कैंसर का इलाज करवाया और वर्ष 2010 में उन्होंने कैंसर की बीमारी को अपने साहसिक जज्बे से परास्त कर दिया।
अभिनेत्री सोनाली बेंद्रे का कैंसर से पीड़ित मशहूर हस्तियों की सूची में उनका नाम भी जुड़ गया है। न्यूयार्क (अमेरिका) में बीमारी का इलाज करवाकर वह स्वस्थ होकर देश वापिस आ गयी हैं। अभिनेत्री मनीषा कोइराला को नवंबर 2012 में पता चला था कि वह कैंसर से पीड़ित हैं। उस समय वह काठमांडू में रह रही थीं। पहले तो उन्हें इस बात पर यकीन ही नहीं हो रहा था लेकिन बाद में उन्होंने इसे अपनी जंग माना और इस पर जीत हासिल की। साल 2014 तक उन्होंने इससे पूरी तरह मुक्ति पा ली। 2004 में बालीवुड के मशहूर निर्देशक अनुराग बासु को ब्लड कैंसर हो गया था। हालांकि वह इससे हारे नहीं और पूरे 3 साल तक केमोथैरपी कर वापिस बालीवुड में लौटे।
हिंदी फिल्मों में काम कर चुकीं कनाडियन एक्ट्रेस लीजा रे भी साल 2009 में कैंसर से पीड़ित हो गई थीं। हालांकि उन्होंने हार नहीं मानी और इलाज कर जंग जीत ली। 54 वर्षीय बालीवुड एक्ट्रेस मुमताज को भी ब्रेस्ट कैंसर हो गया था लेकिन उन्होंने भी इलाज करा जिंदगी में वापसी कर ली। अप्रैल 2017 में बालीवुड के स्टार एवं पूर्व सांसद विनोद खन्ना की ब्लैडर कैंसर की वजह से मौत हुई थी। उन्होंने गुरदासपुर में कहा था कि उन्हें 2010 से कैंसर है। इसी वजह से वे पब्लिक लाइफ से दूर हैं।
उपरोक्त खास हस्तियों के अलावा देश के लाखों आम लोग भी हैं जो कैंसर जैसी बीमारी से ग्रस्त होकर अनमोल जीवन गंवा चुके हैं या फिर वे लोग हैं जो अपनी सीमित मासिक आय से इस बड़ी बीमारी से लड़ रहे हैं। कैंसर जैसी बीमारी ने अनेक परिवारों को मंहगे इलाज के चलते गरीबी की ओर ढकेल दिया है।
अभी हाल ही में प्रकाशित एक समाचार के अनुसार देश में तीन में से दो बच्चों की मौत कुपोषण की वजह से हो रही है। इंडिया स्टेट-लेवल डिजीज बर्डन इंनिशिएटिव के तहत किया गया यह अध्ययन प्रसिद्ध मेडिकल जर्नल लैंसेट में प्रकाशित हुआ है। इसके अनुसार कुपोषण सभी आयु वर्ग के लोगों के लिए बड़ा जोखिम है। बच्चों में यह खासतौर पर खतरनाक है। कुपोषण के संकेतकों में जन्म के समय शिशु का कम वजन मृत्यु के बड़े कारणां में शामिल है।
देश की यह सच्चाई हमें यह मांग करने पर मजबूर कर रही है कि सरकार का दायित्व केवल सरकारी कर्मचारियों के प्रति ही नहीं हैं। सरकार को एक पिता की तरह देश के प्रत्येक व्यक्ति को अपनी संतान की तरह मानना चाहिए। सरकार को एक पिता के रूप में संवेदनशील होकर वोटरशिप अधिकार कानून को लागू करके प्रत्येक वोटर के खाते में सीधे कुछ निर्धारित धनराशि भेजनी चाहिए। ताकि देश का प्रत्येक वोटर अपने जीवन स्तर तथा खानपान में सुधार लाकर कुपोषण से जंग जीत सके। राजनैतिक आजादी की तरह आर्थिक आजादी भी प्रत्येक वोटर का संवैधानिक अधिकार हैं। भारत विश्व गुरू रहा है। देश ने हमेशा पूरे विश्व को लीडरशिप दी है। हमारे दर्शन, ज्ञान, कला, संगीत और विज्ञान की पूरी दुनिया को जरूरत है। वोटरशिप अधिकार कानून लागू करके भारत सारे विश्व के समक्ष आर्थिक आजादी की एक मिसाल कायम कर सकता है।


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