नाटक “आधा इधर-आधा उधर” में गुलफाम ने खूब हंसाया

वरिष्ठ पुलिस अधिकारी राजीव नारायण श्रीवास्तव की स्मृति में हुआ हास्य नाटक का मंचन


पुनीत अस्थाना और केशव पंडित के निर्देशन में कलामंडपम में हुआ कॉमेडी शो


लालच न करने का दिया गया संदेश


लखनऊ।


थर्ड विंग नाट्य संस्था की ओर से हास्य नाटक 'आधा इधर आधा उधर' का मंचन गुरुवार 26 सितंबर को कैसरबाग के भातखंडे कला मंडपम प्रेक्षागृह में किया गया। वरिष्ठ पुलिस अधिकारी रहे राजीव नारायण श्रीवास्तव की स्मृति में नंदिता पांडित की यह हास्य नाट्य प्रस्तुति, पुनीत अस्थाना और केशव पंडित के कुशल निर्देशन में हुई। नाटक ने लालच न करने का संदेश दर्शकों को हास्य की चाश्नी के साथ दिया गया।


नाटक के अनुसार 20वीं सदी के शुरूआती दौर में लखनऊ के व्यापारी नवाब बगलौल साहब, हैदराबाद के युवा व्यापारी जावेद मियां के इस कदर मुरीद हो जाते हैं कि वह उन्हें देखे बिना ही अपनी बेटी गुलनार की शादी तय कर बैठते हैं। कहानी में मोड़ आता है और नवाब बगलौल को पता चलता है कि जावेद की मौत, उनकी बहन शबनम के प्रेमी, आरिफ मियां के हाथों एक कहासुनी के दौरान हो गई है। ऐसी हालत में नवाब बगलौल अपनी बेटी गुलनार का रिश्ता अपने दोस्त डॉ.बुखारा के बेटे, लाडले मियां से तय कर देते हैं। परिवार में सगाई की रस्म चल ही रही होती है कि तभी जावेद मियां वहां पहुंच जाते हैं। उन्हें जिंदा देख कर सभी हैरान हो जातें हैं। बाद में पता चलता है कि जावेद मियां के भेष में जावेद की बहन शबनम होती है जो मर्दाना लिबास में अपने प्रेमी, आरिफ को ढूढते हुए लखनऊ पहुंचती है। इत्तेफाक से शबनम और आरिफ, दोनों ही अंजाने में एक ही सराय में ठहरते हैं। वहां लालची नौकर गुलफाम, दोगुनी तन्ख्वाह की चाह में दोनों की मुलाज़मत हासिल कर लेता है। इस जुगाड़ में वह चक्करघिन्नी बन जाता है और वह एक के बाद एक गलतियां करता जाता है। अंत में उसका झूठ का किला ताश के पत्तों की तरह ढह जाता है। इसके साथ ही नाटक का सुखांत, शबनम और आरिफ, गुलनार और लाडले मियां, गुलफाम और बुलबुल के निकाह के ऐलान के साथ हो जाता है।


'द सर्वेंट ऑफ टू मास्टर्स' पर आधरित इस नाटक में खासतौर से इटली की कामेदिया देल आर्ते शैली में पेश किया गया। इसमें हास्य व्यंग्य की प्रमुखता रखते हुए फास्ट मूवमेंट, लाउड ऐक्शन और स्टाइलाइजड ऐक्टिंग को तरजीह दी गई थी। इटली के लोकप्रिय नाटककार कार्लो गोल्डीनी ने इसे 1775 में लिखा था। मंच पर नौकर गुलफाम की केन्द्रीय भूमिका में केशव पंडित ने दर्शकों को खूब हंसाया। बगलौल खां के किरदार में अशोक सिन्हा, आरिफ मियां के चरित्र में सचिन तुलसी, शबनम की भूमिका में नवनीत शुभम, गुलनार के रूप में भाव्या द्विवेदी ने दर्शकों की तालियां हासिल की। इसके साथ ही लाडले मियां के रूप में अली खान, डॉ.बुखारा के किरदार में हरीश बडौला, अच्छे मियां के चरित्र में सूरज जोशी, बुलबुल के किरदार में कनिका बालानी, बैरे के रूप में अकबर अहमद और कुली के चरित्र में प्रदीप यादव ने प्रस्तुति को गति प्रदान की। आनन्द अस्थाना के सैट डिज़ाइन में घर और सराय के पलक झपकते बदलते दोहरे सैट ने भी दर्शको को अचंभित किया। आशुतोष विश्वकर्मा की प्रकाश परिकल्पना ने भी नाटक के आकर्षण को बढ़ाया। इस अवसर पर संस्था की अध्यक्षा सरोज अग्रवाल, उपाध्यक्ष अंजली सचान सहित अन्य उपस्थित रहे।


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