योगी सरकार के ढाई वर्ष


डॉ दिलीप अग्निहोत्री
ढाई वर्ष पहले उत्तर प्रदेश में हुआ राजनीतिक परिवर्तन अप्रत्याशित था। इसके पहले प्रदेश की राजनीति सपा और बसपा के दायरे में सिमटी थी। मतदाता एक से नाराज हुआ तो दूसरे को ले आया, उससे नाराज हुआ तो पहले वाले को बहुमत दे दिया। लेकिन इन प्रयोगों के बाद भी जनाकांक्षा पूरी नहीं हुआ। प्रदेश में विकास के अनुकूल माहौल ही नहीं बना। औद्योगिक रूप से प्रदेश बीमारू ही बना रहा। जातिवाद व मजहब के समीकरण प्रमुख हो गए थे। निवेशकों की उत्तर प्रदेश के प्रति कोई दिलचस्पी नहीं थी। इस माहौल में  योगी आदित्यनाथ ने प्रदेश की कमान संभाली थी। उन्होंने उत्तर प्रदेश के विकास का व्यापक रोडमैप बनाया था। विकास की योजनाएं बनाई गई। अनेक योजनाओं पर तेजी से अमल सुनिश्चित किया। प्रयागराज कुंभ, किसानों को राहत, किसानों की कर्जमाफी, डिफेंस कॉरिडोर, आयुष्मान योजना, चार एक्सप्रेस वे पर कार्य, प्रवासी सम्मेलन, आदि सरकार की प्राथमिकताओं में शुमार है। योगी सरकार का शुरू से किसानों पर फोकस बना हुआ है। सपा सरकार ने बड़े राजकोषीय घाटे व ऋण बोझ के साथ खजाना छोड़ा था। विधान सभा में पेश नियंत्रक महालेखा परीक्षक की रिपोर्ट में यह खुलासा हुआ था। राजस्व व्यय का सत्रह व समस्त पूंजीगत व्यय का इक्कीस प्रतिशत से ज्यादा केवल मार्च महीने में खर्च हुआ था।अनेक विभागों ने कुल बजट का चालीस प्रतिशत तक केवल मार्च में खर्च किया। हजारों करोड़ खर्च के बाद विभाग उसका उपभोग प्रमाणपत्र नहीं दे रहे थे। जबकि योगी सरकार प्रदेश के विकास की योजनाओं को समय से पूरा करने का प्रयास कर रही है। उसने कथित मार्च लूट पर भी प्रतिबंध लगा दिया है।
योगी आदित्यनाथ ने सबसे पहले प्रदेश के माहौल को सुधारने का कार्य किसी। अन्य सुधार भी इसी से जुड़े थे। योगी ने इस तथ्य को समझ लिया था। इसी के अनुरूप उन्होंने सुशासन की स्थापना को प्राथमिकता दी। इसके बाद बिजली और सड़क को महत्व दिया। डिफेंस कॉरिडोर में पच्चीस हजार करोड़ रुपये के निवेश का निर्णय लिया गया। अगले पांच वर्ष में प्रदेश दास खरब डॉलर की अर्थव्यवस्था बन सकता है। इस दिशा में प्रयास जारी हैं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने देश को पांच ट्रिलियन डॉलर अर्थव्यवस्था बनाने का संकल्प लिया है। इसमें योगी आदित्यनाथ ने उत्तर प्रदेश का योगदान तय किया है। उत्तर प्रदेश इसमें एक ट्रिलियन डॉलर का योगदान करेगा। इसके लिए इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ मैनेजमेंट के साथ मिलकर कार्ययोजना बनाई गई है। इसके मद्देनजर प्राथमिकताएं भी तय की गई है।योगी ने कहा कि जब उन्होंने पद संभाला था तब अर्थव्यवस्था, विकास, कानून व्यवस्था की दशा खराब थी। अराजकता, भ्रष्टाचार और असुरक्षा का माहौल था। शिक्षा व्यवस्था बदहाल थी। इन समस्याओं का निराकरण किया गया। एक जनपद एक उत्पाद योजना लागू की गई। यह सफल रही है। मुरादाबाद के पीतल, अलीगढ़ के ताला, लखनऊ के चिकन, कन्नौज के इत्र, फिरोजाबाद के ग्लास और गोरखपुर के टेराकोटा उद्योग को बड़ी उछाल मिली है। इसके माध्यम से पच्चीस लाख युवाओं  रोजगार मिलेगा। इन प्रयासों से मुरादाबाद से पिछले साल छह हजार करोड़ भदोही से चार हजार करोड़ रुपये का निर्यात हुआ। अन्य जनपदों से भी बेहतर परिणाम मिल रहे है। अब तक प्रदेश में दो लाख करोड़ रुपये से ज्यादा का निवेश हो चुका है।
प्रयागराज कुम्भ में संख्या, सुरक्षा, स्वच्छता और सुव्यवस्था के नए रिकार्ड बने। अयोध्या में दीपोत्सव और मथुरा में रंगोत्सव से आध्यात्मिक, सांस्कृतिक परंपरा के साथ ही पर्यटन को बढ़ावा देने की शुरुआत की गई। पहली बार अप्रवासी भारतीय सम्मेलन हुआ। इसमें  छिहत्तर देशों के साढ़े सात हजार से ज्यादा प्रतिनिधि शामिल हुए। सरकार बनने के चौबीस घंटे में बूचड़खाने बंद किये गए।
इन्फ्रास्ट्रक्चर और इंटर स्टेट कनेक्टिविटी को मजबूत बनाया जा रहा है। एक्सप्रेस वे बन रहे हैं। पहला जल मार्ग वाराणसी में शुरु हुआ है। पूर्व और पश्चिम फ्रंट कॉरिडोर प्रदेश से गुजर रहे हैं। इनका जंक्शन दादरी में है। ढाई साल में इन्फास्ट्रक्चर और इंडस्ट्री में बड़ा निवेश होगा। पांच वर्ष में यूपी सबसे तेजी से उभरने वाली अर्थव्यवस्था वाले राज्यों में होगा।
डिफेंस कॉरिडोर में कोरिया, इस्राइल, रूस, फ्रांस, जर्मनी ने रुचि दिखाई है। इसका क्षेत्र झांसी, चित्रकूट, कानपुर, आगरा, अलीगढ़ और लखनऊ होगा। इसी क्रम में लखनऊ में डिफेंस एक्सपो आयोजित किया जाएगा।  वेब पोर्टल के रूप में निवेश मित्र की स्थापना की गई है। पूरी प्रक्रिया ऑनलाइन होने से निवेशकों को सुविधा हुई है।
तीन करोड़ से अधिक शौचालय बनाये गए। पच्चीस लाख प्रधानमंत्री आवास बनाकर गरीबों को दिए गए। सड़क, बिजली, पानी की व्यवस्था को गरीब, गांव और किसानों के साथ जोड़ा जा रहा है। ढाई साल में कोई दंगा नही हुआ। पहले पशुओं को उठाकर बूचड़खाने में भेज दिया जाता था। अब उन्हें संरक्षण दिया जा रहा है। योगी आदित्यनाथ ने केंद्र सरकार की प्रेरणा से विकास के अनेक कीर्तिमान स्थापित किये हैं। स्वच्छता, शौचालय निर्माण, प्रधानमंत्री निर्धन आवास निर्माण आदि के मामले में उत्तर प्रदेश नम्बर वन पर पहुंच गया है। यह उपलब्धि केवल ढाई वर्षों में ही हासिल हुई है। अब अगले चरण में योगी आदित्यनाथ ने उत्तर प्रदेश को आर्थिक रूप से मजबूत बनाने का लक्ष्य निर्धारित किया है। योगी ने कहा भी है कि देश का प्रत्येक पांचवा व्यक्ति उत्तर प्रदेश का है। ऐसे में उत्तर प्रदेश को एक ट्रिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था तक ले जाना हमारा कर्तव्य है।
उत्तर प्रदेश में इन्वेस्टर्स समिट पिछली सरकारों के समय भी बहुत जोर शोर से होती रही है और उनमें देश के शीर्ष उद्योगपति शामिल होते रहे हैं। इसके माध्यम से प्रदेश के औद्योगिक विकास का सपना भी दिखाया जाता रहा है, लेकिन इस समिट से जमीनी स्तर पर कोई विशेष उपलब्धि हासिल नहीं हुई। बाद में पता चला कि प्रदेश में निवेश के अनुकूल माहौल ही नहीं था, इसलिए उद्योगपति समिट में तो शामिल हुए, लेकिन उन्होंने निवेश में रुचि नहीं दिखाई। कुछ तो प्रारंभिक रुकावटों से परेशान होकर प्रदेश को अलविदा कह गए। योगी आदित्यनाथ ने पहले निवेश के अनुकूल माहौल बनाया, सरकारी मशीनरी को चुस्त दुरुस्त किया, संबंधित मंत्रियों व अधिकारियों को तैयार किया, इसके बाद इन्वेस्टर्स समिट का आयोजन किया। यही कारण था कि दो हजार अठारह में प्रदेश में अभूतपूर्व इन्वेस्टर्स समिट का आयोजन हुआ। फिर कुछ महीने बाद शिलान्यास समारोह का भी आयोजन हुआ। इंफ्रास्ट्रक्चर, ऊर्जा, कृषि, परिवहन के अलावा न्यू जनरेशन के डाटा सेंटर, एयरोस्पेस रक्षा आदि क्षेत्रों में बेहतर कार्य हो रहे हैं। एचसीएल ने लखनऊ में विश्व का सबसे बड़ा कैंपस बनाया है। कृषि आधारित खाद्य व्यवसाय को भी प्रदेश में प्रोत्साहन दिया जा रहा है। इससे किसानों की आमदनी भी बढ़ेगी। उत्तर प्रदेश औद्योगिक और नवाचार केंद्र के रूप में अपनी पहचान बनाने की दिशा में बढ़ रहा है। ईज ऑफ डूइंग बिजनेस के मामले में उत्तर प्रदेश पांचवें स्थान पर आ गया है। ऐसे में कहा जा सकता है कि ढाई वर्ष में योगी सरकार की उपलब्धियां अभूतपूर्व है।


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