49 हस्तियों के खिलाफ केस बंद करने का आदेश जन प्रतिवाद की जीत: माले

लखनऊ।


भारत की कम्युनिस्ट पार्टी (माले) की राज्य इकाई ने प्रधानमंत्री मोदी को भीड़ हत्या (मॉब लिंचिंग) पर दखल देने की अपील करते हुए पत्र लिखने वाले इतिहासकार रामचंद्र गुहा, फिल्मकार श्याम बेनेगल, अपर्णा सेन समेत 49 हस्तियों के खिलाफ मुजफ्फरपुर की एक अदालत के आदेश पर दर्ज हुए केस को बंद करने के बिहार पुलिस के फैसले को देश भर से उठे जन प्रतिवाद की जीत बताया है।
पार्टी राज्य सचिव सुधाकर यादव ने आईपीएन से बातचीत में कहा कि पत्र के माध्यम से भीड़ हत्या का विरोध करने वाले जाने-माने लेखकों व कलाकारों के ऊपर राष्ट्र द्रोह का मुकदमा लगाना सबको आश्चर्यचकित करने वाला था। यह भी कहा जाने लगा था कि ऐसा 'मोदी है तो मुमकिन है'। यह एक बेतुका केस था जिससे यह संदेश निकल रहा था भीड़ हत्या जैसे देश को शर्मसार करने वाली घटनाओं पर जो भी विरोध स्वरुप बोलेगा उसे प्रताड़ित किया जाएगा। लेकिन इसके खिलाफ अन्य फिल्मकारों समेत लोकतांत्रिक संगठनों व व्यक्तियों की ओर से देश भर से उठी आवाज और सबूतों के अभाव ने अन्ततः केस को बंद करने का फैसला पुलिस को लेना पड़ा। यह जनता की जीत है।



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