एक प्रयोगधर्मी के रूप में सदैव समृति में रहेंगे नाना जी देशमुख : डॉ भरत


नाना जी देशमुख की जयंती पर ''नाना आना बार बार'' कार्यक्रम सम्पन्न
गोण्डा।


राष्ट्र ऋषि नाना जी देशमुख एवं लोकनायक जय प्रकाश नारायण के जयन्ती पर शुक्रवार को डॉ0 सम्पूर्णानन्द प्रेक्षागृह में भारत रत्न राष्ट्र ऋषि नाना जी देशमुख स्मृति आयोजन समिति के तत्वावधान में ''नाना आना बार बार'' शीर्षक से जयन्ती कार्यक्रम आयोजित किया गया, जिसमें मुख्य अतिथि राष्ट्रीय स्वयं संघ के वरिष्ठ प्रचारक रामाशीष, मुख्य वक्ता के रूप में नमामि गंगे प्रोजेक्ट के राष्ट्रीय संयोजक डॉ0 भरत पाठक तथा विशिष्ट अतिथि स्वच्छ भारत मिशन ब्रांड अम्बेसडर डॉ0 नंदिता पाठक उपस्थित रहीं।  
कार्यक्रम का शुभारम्भ नाना जी एवं जयप्रकाश नारायण जी के चित्र के समक्ष दीप प्रज्जवलित कर किया गया। अतिथियों का परिचय राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ के जिला कार्यवाह ओम प्रकाश पाण्डेय ने कराया। अपने उद्बोधन में नाना जी से जुड़े संस्मरणों को पूर्व सांसद सत्यदेव सिंह, केके श्रीवास्तव, जनार्दन सिंह, राम कृष्ण तिवारी आदि ने उपस्थित जनों के मध्य साझा किया।
मुख्य वक्ता के नाते उपस्थित डॉ0 भरत पाठक ने अपने सम्बोधन में कहा कि दीनदयाल शोध संस्थान का प्रत्येक कार्यकर्ता गोण्डा एवं बलरामपुर की जनता को प्रणाम करते हुए साधुवाद देता है कि नाना जी के स्मृति में इस प्रकार के अभिनन्दन कार्यक्रम आयोजित हो रहे है क्योंकि अपने जीवन काल का अधिक समय नाना जी ने इसी जिले में समाज कार्य करते हुए व्यतीत किया था। डॉ0 पाठक ने कहा कि नाना जी सदैव छोटी छोटी बातों पर विशेष ध्यान देते थे उनका व्यक्तित्व व कृतित्व सदैव एक प्रयोगधर्मी के रूप में स्मरण किया जायेगा। स्वच्छता हम सबके लिए एक मिशन के रूप में होनी चाहिए। उन्होंने गांधी जी एवं नाना जी के स्वच्छता के प्रति समर्पण के उदाहरण को साझा करते हुए उपस्थितजनों से पॉलीथीन एवं प्लास्टिक के बहिष्कार के लिए अपील की।
विशिष्ट अतिथि के रूप में मंचस्त स्वच्छ भारत मिशन की ब्रान्ड अम्बेसडर डॉ0 नन्दिता पाठक ने कहा कि नाना जी सदैव समाज के पीड़ित, वंचित एवं उपेक्षित जनों की सेवा के लिए जीवन परयंत संकल्पित रहे। उनके द्वारा किए गये ग्राम विकास के कार्यो के लिए हम सभी को आगे आना होगा।
कार्यक्रम के मुख्य अतिथि एवं नाना जी के सहयोगी वरिष्ठ प्रचारक रामाशीष जी ने अपने उद्बोधन में कहा कि महापुरूषों के व्यक्तित्व व कृतित्व से प्रेरणा लेकर उनके द्वारा दिए गये संदेशों पर चलना ही श्रेष्ठकर है। आज के अवसर पर हम सबको संकल्प लेना होगा कि अपने दिनचर्या में से कुछ समय समाज एवं उपेक्षित जनों के सेवा लगाना होगा। उन्होंने कहा कि समाज के अन्तिम पायदान पर खड़े जनों की सेवा करना ईश्वरीय कार्य है हमें समाज एवं राष्ट्र के प्रति सदैव चिंतनशील रहना चाहिए।


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