मण्डलायुक्त ने ऑडिट आपत्तियों सम्बन्धी प्रकरणों में नियमानुसार कार्यवाही के दिए निर्देश

गोण्डा।

आयुक्त देवीपाटन मण्डल महेन्द्र कुमार ने मण्डल के समस्त जिलाधिकारियों के माध्यम से सभी अध्यक्ष व अधिशासी अधिकारी नगर निकायों को निर्देशित किया है कि उनके द्वारा अनुश्रवण समिति की बैठक में उपनिदेशक ऑडिट द्वारा उनके संज्ञान में लाये गये प्रकरणों में नियमानुसार कार्यवाही करना सुनिश्चित करें।
आयुक्त ने कहा कि 14वें वित्त आयोग के अन्तर्गत प्राप्त होने वाले निष्पादन अनुदान की शर्तों जैसे निकाय में दोहरा लेखा प्रणाली अपनाना, वर्षानुवर्ष बैलेन्स शीट तैयार करना, आय के श्रोतों में क्रमागत वृद्धि करना आदि मूलभूत प्रतिबन्ध थे। नगर पालिका एवं नगर पंचातयों द्वारा उन शर्तों को न पूर्ण किए जाने के कारण संस्था को निष्पादन अंश से वंचित होना पड़ता है जिससे संस्था का विकास प्रभावित हो़ता है। उन्होंने निर्देश दिए हैं कि 14वें वित्त आयोग से स्वीकृत अनुदान के सापेक्ष प्रस्तावित कार्यों में अनुमानित लागत के कारण बढ़ी हुई धनराशि के व्यय हेतु पालिका/पंचायत निधि का उपयोग किया जाय। जबकि शर्त के आधार पर वित्तीय व प्रशासनिक स्वीकृति जिलाधिकारी की अध्यक्षता में गठित समिति द्वारा की जाती है, जो नियम संगत है परन्तु पालिका/पंचायतों द्वारा इन शर्तों का विचलन कर बढ़ी हुई धनराशि का भुगतान पालिका निधि से न करके राजकीय अनुदान (राज्य वितत आयोग) से कर दिया जाता है, जो आपत्तिजनक है।
आयुक्त ने कहा कि स्वच्छ भारत मिशन के अन्तर्गत प्राप्त होने वाले  अनुदानों में घरेलू शौचालय के निर्माण के साथ-साथ सार्वजनिक शौचालय व स्वच्छता उपकरणों के क्रय एवं जनजागरण मदों में भी धनराशियां उपलब्ध कराई जाती है। पालिका/पंचायत द्वारा उन धनराशियों को समयबद्ध तरीके से उपयोग न किए जाने से सार्वजनिक शौचालय, डस्टबिन आदि का क्रय न हो पाने से योजना का मूलभूत लाभ जनहित में नहीं मिल पा रहा है, साथ ही साथ जागरूकता अभियान चरणबद्ध तरीके से न चलाए जाने के कारण योजना का अपेक्षित लाभ नहीं मिल पा रहा है। इसके साथ ही आयुक्त ने कहा कि नगर पालिका/पंचायतों में सॉलिड वेस्ट मैनेजमेन्ट (ठोस अपशिष्ट प्रबन्धन) योजना में निर्धारित मानकों तथा डम्पिंग ग्राउन्ड का चिन्हींकरण, डोर टू डोर कलेक्शन, कूड़े का विलगीकरण आदि समुचित रूप से न हो पाने के कारण वर्षानुवर्ष अनुदान की धनराशियां उपभोग तो हो रही हैं परन्तु समुचित लाभ नहीं प्राप्त हो रहा है। इसके अतिरिक्त उन्होंने कहा कि पेंशन निधि के खाते का संचालन जिलाधिकारी के अधीन होना चाहिए किन्तु स्थानीय निकायों को छोड़कर अन्य निकायों में इस खाते का संचालन अध्यक्ष एवं अधिशासी अधिकारी द्वारा किया जा रहा है।
आयुक्त ने सभी बिन्दुओं पर अपेक्षित कार्यवाही करने हेतु अनुपालन सुनिश्चित कर कृत कार्यवाही से उन्हें अवगत कराने के लिए सम्बन्धित अधिकारियों को निर्देशित किया है।

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