रक्षा मंत्री श्री राजनाथ सिंह ने समुद्री सुरक्षा में नौसेना द्वाराकिए स्वदेशीकरण के प्रयासों की प्रशंसा की

रक्षा मंत्री श्री राजनाथ सिंह ने आज यहां नौसेना कमांडरों के सम्मेलन को संबोधित किया और नौसेना के वरिष्ठ नेतृत्व से मिलने पर अपनी खुशी ज़ाहिर की।


श्री राजनाथ सिंह ने कहा कि कई नौसेना जहाजों, पनडुब्बियों और आईएमएसी (सूचना प्रबंधन एवं विश्लेषण केंद्र) जैसे प्रतिष्ठानों का दौरा करने के बाद और समुद्र में नौसैन्य अभियानों की एक विस्तृत श्रंखला देखने के बाद उन्हें यकीन है कि भारतीय नौसेना देश के समुद्री हितों की रक्षा करने का अपना कर्तव्य निभाती रहेगी।


रक्षा मंत्री ने कहा कि भारतीय अर्थव्यवस्था वर्ष 2025 तक पांच ट्रिलियन डॉलर के निशान तक पहुंचे इसके लिए एक स्थिर और संतुलित वातावरण की आवश्यकता है जिसमें नौसेना को हमारी आर्थिक जीवन रेखा कहलाने वाली संचार की समुद्री लाइनों (एसएलओसी) की सुरक्षा करने के रूप में एक महत्वपूर्ण भूमिका निभानी है। उन्होंने कहा कि इस साल मई और जून में ओमान की खाड़ी में तेल टैंकरों पर हमले की घटनाओं के मद्देनजर नौसेना ने जितने तेज़ और उचित ढंग से 'ऑपरेशन संकल्प' शुरू किया उसे देखना प्रसन्नता भरा था। 'ऑपरेशन संकल्प' के दौरान देश की इस ऊर्जा जीवनरेखा के माध्यम से भारतीय ध्वज वाले व्यापारिकजहाजों को अपने पहरे में लाते हुए नौसेना ने भारत के महत्वपूर्ण राष्ट्रीय हितों की रक्षा करने की अपनी क्षमता को सशक्त रूप से दोहराया है।


वैश्विक आतंकवाद पर बोलते हुए रक्षा मंत्री ने कहा कि ये सभी सुरक्षा बलों के लिए चुनौती बना हुआ है और समुद्री मार्गों की अपनी कमज़ोरियां हैं। 26/11 के मुंबई आतंकी हमलों के बाद नौसेना ने हमारे जल और तटीय क्षेत्रों की सुरक्षा और स्थिरता को मजबूत करने और एजेंसियों के मध्य सहयोग और समन्वय को बढ़ाने के लिए ठोस प्रयास किए हैं। उन्होंने नौसेना के कमांडरों से प्रक्रियाओं की समीक्षा जारी रखने और तटीय सुरक्षा ढांचे को मजबूत करने का आग्रह किया ताकि उभरते खतरों और चुनौतियों का प्रभावी ढंग से मुकाबला किया जा सके।


नौसेना की भूमिका की सराहना करते हुए रक्षा मंत्री ने कहा कि 2008 से अदन की खाड़ी में नौसेना की समुद्री डकैती विरोधी गश्त हमारे समुद्री हितों की रक्षा करने में सफल रही है और इस क्षेत्र की समुद्री सुरक्षा को बनाए रखने में इसने बहुत योगदान दिया है जो कि हमारे माननीय प्रधानमंत्री के विज़न के अनुरूप है।


 


श्री राजनाथ सिंह ने भारतीय नौसेना द्वारा भारतीय और विदेशी तटों पर हाल के दिनों में किए गए कुशल मानवीय सहायता कार्यों और आपदा राहत कार्यों के लिए उसकी सराहना की। इसने उन्हें भारतीय नौसेना की पहुंच, गतिशीलता, निर्वाह, दृढ़ता और न सिर्फ देश में बल्कि पूरे हिंद महासागर क्षेत्र में शांति और युद्ध काल में ऑपरेशन कार्यों को अंजाम देने की क्षमता को लेकर आश्वस्त किया है।


 


रक्षा मंत्री ने कहा कि भारतीय नौसेना ने न सिर्फ हिंद महासागर क्षेत्र के देशों बल्कि दुनिया भर के समुद्री देशों के साथ सक्रिय सहयोग और जुड़ाव के माध्यम से राष्ट्रीय और विदेश नीति के उद्देश्यों को आगे बढ़ाते हुए सैन्य कूटनीति के लिए ख़ुद को एक महत्वपूर्ण साधन के रूप में स्थापित किया है। नौसेना की विदेश सहयोग पहलों और विदेशी नौसेनाओं की क्षमता बढ़ाने व क्षमता निर्माण करने में निरंतर प्रयासों की तारीफ करते हुए उन्होंने कहा कि इन पहलों ने न केवल इस क्षेत्र में समुद्री सुरक्षा और स्थिरता को मजबूत किया है, बल्कि भारतीय हिंद महासागर क्षेत्र में जुड़ाव के लिए भारतीय नौसेना को एक पसंदीदा साझेदार के रूप में भी तब्दील किया है।


 


श्री राजनाथ सिंह ने सरकार की 'मेक इन इंडिया' पहल के अनुरूप स्वदेशीकरण के क्षेत्र में नौसेना की भूमिका की सराहना की। नौसेना की मौजूदा और भविष्य की विस्तार योजनाओं के अनुरूप समुद्री बुनियादी ढांचा परियोजनाओं के लिए भी समर्पित ज़ोर लगाया गया है। इसमें मुंबई में एयरक्राफ्ट कैरियर ड्राई डॉक जैसी रणनीतिक बुनियादी ढांचा परियोजनाएं शामिल हैं जिसका उद्घाटन पिछले महीने रक्षा मंत्री ने किया था। उन्होंने वरिष्ठ नेतृत्व आग्रह किया कि भविष्यमूलक क्षमता विकास पर अपना ध्यान बनाए रखें ताकि यह सुनिश्चित हो सके कि देश की समुद्री शक्ति हमारे आर्थिक हितों के साथ मेल खाते हुए बढ़ती रहे।


 


रक्षा मंत्री ने कहा कि उन्होंने पिछले महीने आईएनएस खंडेरी को अधिकृत किया था और नीलगिरि का लॉन्च देखा था। ये मंच इस बात की गवाही देते हैं कि कैसे हमारे देश ने युद्धपोत निर्माण में आत्मनिर्भरता को प्राप्त किया है। जटिल मशीनरी और अत्याधुनिक हथियारों और सेंसर के साथ स्वदेशी सामग्री को बढ़ाने की आवश्यकता पर उन्होंने बल दिया और सभी हितधारकों से इन मोर्चों पर सभी प्रयासों को लागू करने का आग्रह किया।


 


प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी द्वारा सीडीएस (चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ) की घोषणा किए जाने पर बोलते हुए रक्षा मंत्री ने कहा कि इससे तीनोंरक्षा सेवाओं के बीच समग्र समन्वय में भी बेहतरी आएगी।


 


रक्षा मंत्री ने दोहराया कि एक मजबूत नौसेना भारत की सुरक्षा और समृद्धि की एक आवश्यक गारंटर है और इसलिए एक आधुनिक, शक्तिशाली और विश्वसनीय नौसेना की आवश्यकता इतना बल देकर बात करने से स्पष्ट हो जाती है। उन्होंने कहा कि उन्हें भरोसा है नौसेना के कमांडर नौसेना की क्षमता और दक्षता को बढ़ाने के लिए महत्वपूर्ण ध्यान वाले क्षेत्रों और रणनीतियों की पहचान करेंगे और उन्होंने इन विचार-विमर्शों के फलदार होने की कामना की।


 


नौसेना स्टाफ के प्रमुख एडमिरल करमबीर सिंह, रक्षा सचिव डॉ. अजय कुमार, रक्षा आरएंडडी विभाग के सचिव और डीआरडीओ के अध्यक्ष डॉ. जी सतीश रेड्डी, नौसेना के कमांडर और रक्षा मंत्रालय के अन्य वरिष्ठ अधिकारी इस मौके पर उपस्थित थे।


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