चौ0 चरण सिंह वि0वि0 का 31वां दीक्षान्त समारोह सम्पन्न

समाज में परिवर्तन लाने के लिए हिम्मत से आगे बढ़ना होता है : राज्यपाल
समाज में जनचेतना व बदलाव लाना ही सच्चा दीक्षान्त : कुलाधिपति
सौर ऊर्जा से विद्युत उत्पादन करने वाला प्रदश का पहला विश्वविद्यालय चौ0 चरण सिंह वि0वि0-प्रो0 तनेजा
मेरठ।

चौ0 चरण सिंह विश्वविद्यालय के 31वें दीक्षान्त समारोह का शुभारम्भ कुलाधिपति विश्वविद्यालय/राज्यपाल आनंदी बेन पटेल ने मां सरस्वती की प्रतिमा के सम्मुख दीप प्रज्जवलन कर किया। उन्होंने कहा कि हम सब प्रयास व स्पर्धा कर तथा तकनीक का उपयोग कर आगे बढ़े। उन्होंने कहा कि भारत एक युवा दश है तथा समाज में परिवर्तन लाने के लिए हिम्मत से आगे बढना होता है। उन्होंने कस्तूरबा गांधी बालिका विद्यालय खरखौदा की छात्राओं को फल व पुस्तक भेंट की। उपाधि प्राप्तकृर्ता छात्र-छात्राओं ने एक स्वर में कहा कि हम प्रतिज्ञा करते है कि हम आजीवन इस उपाधि के योग्य सिद्ध होंगे। कुलाधिपति ने 1188 छात्र-छात्राओं को विभिन्न उपाधियां तथा 224 छात्र-छात्राओं को स्वर्ण/रजत पदक एवं पदक/विशिष्ट योग्यता प्रमाण पत्र प्रदान किए।
करीब 222 एकड़ भूक्षेत्र में विकसित व 1014 महाविद्यालय/संस्थानों को संबद्धता देने वाले चौ0 चरण सिंह विश्वविद्यालय के दीक्षान्त समारोह की अध्यता करते हुए मा0 राज्यपाल/कुलाधिपति आनंदीबेन पटेल ने कहा कि जब वह प्रधानमंत्री गुजरात राज्य के मुख्यमंत्री थे तब उन्होंने यह प्रण लिया था कि उनको जो भी गिफ्ट मिलेगा उसकी नीलामी कर प्राप्त धनराशि से लड़कियों की फीस व उनको कम्प्यूटर आदि देने की व्यवस्था की जाएंगी। उन्होंने कहा कि आज के दीक्षान्त समारोह में स्वर्ण पदक पाने वालों में छात्राएं अधिक है और छात्र कम है। छात्रों को भी अच्छी पढ़ाई करके आगे बढ़ना चाहिए। उन्होंने कहा कि भारत एक युवा दश है तथा दश की जनसंख्या का 65 प्रतिशत युवा है। इसलिए यहा तरक्की की संभावनाएं अपार है।
उन्होंने कहा कि आगामी गांधी जयन्ती पर सभी को स्वच्छता की संकल्प लेकर स्वच्छता को अपनाना चाहिए। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री ने पूर्व में सेल्फी विद डाटर्स लेकर उसको साशल साईटस पर अपलोड़ करने का आहवान किया, जिसको लोगों ने गम्भीरता से लेते हुए किया। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री सभी बेटियां का घर, समाज में सम्मान हो इस बात पर जोर दे रहे है, इसलिए हमें नारी चाहे वह अध्यापक, किसान, डाक्टर, इंजीनियर आदि किसी भी क्षेत्र में हो, उसको सम्मानित करना चाहिए।
उन्होंने कहा कि हमारे पूर्वजों ने सती प्रथा, बाल विवाह जैसी कुप्रथाओं को मिटाया है लेकिन फिर भी समाज में कुरीतियां व्यापत है। उन्हांने कहा कि सोनोग्राफी का आविष्कार मां के गर्भ में पल रहे बच्चे के स्वास्थय की जांच के लिए किया गया लेकिन लोगो ने इसका गलत उपयोग कर लिंग निर्धारण कराना शुरू कर दिया और लडकियों का गर्भपात कराना शुरू कर दिया। इसलिए गर्भपात का प्रदूषण बढ़ गया, जिसको कम करने के लिए मा0 प्रधानमंत्री जी ने बेटी बचाओं बेटी पढ़ाओं अभियान प्रारम्भ किया। उन्होंने कहा कि हम सभी संकल्प लें कि हम हमारे घरों में बेटी का सम्मान जरूर करेंगे। उन्होंने कहा कि महिलाएं आज हर क्षेत्र में आगे बढ़ रही है।
उन्होंने कहा कि विश्वविद्यालय या कोई भी संस्था या प्रशासनिक अधिकारी जब कोई गांव गोद ले तो वहां 4 बातों पर विशेष ध्यान दिया जाएं, जिसमें पहली कक्षा में गांव के सभी बच्चे प्रवश लें, आठवीं की कक्षा के बाद छात्र-छात्राएं नवीं की कक्षा में अवश्य प्रवश लें, गांव की हर महिला के बच्चे की डिलीवरी अस्पतालों में हो। उन्हांने कहा कि हम सभी को प्लास्टिक मुक्त भारत बनाने के लिए संकल्प लेना होगा तभी यह कार्य मूर्त रूप में परिलक्षित होगा।
उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री ने भारत को वर्ष 2025 तक टीबी रोग से मुक्त करने का लक्ष्य रखा है, जिसके लिए मिलकर प्रयास करने होंगे। उन्होंने जनपद में टीबी रोग से प्रभावित 18 वर्ष से कम आयु के 345 बच्चों को एनजीओ व अधिकारियों द्वारा गोद लिए जाने पर प्रसन्नता व्यक्त की। उन्होंने कहा कि वर्तमान में चौ0 चरण सिंह विश्वविद्यालय का बी प्लस-प्लस ग्रेड है। उन्होंने कहा कि वर्ष 2021 में पुनः मान्यता/ग्रेडिंग का कार्य किया जा रहा हो तब विश्वविद्यालय ए प्लस-प्लस ग्रेडिंग में हो, ऐसा प्रयास सभी मिलकर करें। उन्होंने कहा कि मा0 प्रधानमंत्री जी हर महीने के अंतिम रविवार को मन की बात करते है, जिसको सभी को सुनना चाहिए।
उन्होंने कहा कि बाल विवाह नहीं होना चाहिए। 21 से कम आयु के कम लड़के का व 18 से कम आयु की लड़की का विवाह कराना कानूनन अपराध है। उन्होंने कहा कि उन्होंने स्वयं आगे आकर उनके भाई के यहां हो रहे बाल विवाह को रूकवाया था। उन्होंने कहा कि समाज में परिवर्तन लाने के लिए हिम्मत से आगे बढना होता है। उन्होंने कहा कि दहेज प्रथा भी समाज की एक कुरीति है, जिसको भी रोका जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि समाज में जनचेतना व बदलाव लाना भी इस दीक्षान्त समारोह का एक उद्दश्य होना चाहिए और यहीं मेरा सच्चा दीक्षान्त है।
उन्हांने कहा कि हम सब संकल्प लें कि हम हमारे दश के लिए काम करते रहेंगे। उन्होंने कहा कि विश्वविद्यालय के सभी अध्यापक जिसमें कार्यालयाध्यक्ष भी शामिल है, सभी को कक्षाएं लेनी चाहिए। राज्यपाल को कुलपति विश्वविद्यालय ने शॉल भेंट की व किताबों का एक पैकेट भेंट किया। उन्होंने मुख्य अतिथि को भी शॉल भेंट किया। कुलपति ने कार्यक्रम प्रारम्भ होने के अवसर पर कुलाधिपति/राज्यपाल तथा मुख्य अतिथि को फलों की टोकरी व पौधा भेंट कर उनका स्वागत किया। इस अवसर पर प्रारम्भ में राष्ट्रगीत हुआ तथा समापन पर राष्ट्रगान हुआ।
कार्यक्रम समारोह के मुख्य अतिथि/सदस्य नीति आयोग व 15वें वित्त आयोग भारत सरकार प्रो0 रमश चन्द्र ने कहा कि चौ0 चरण सिंह के आर्दशों एवं मूल्यों से अनवरत रूप से प्रेरणा प्राप्त करते हुए यह विश्वविद्यालय उच्च शिक्षा के क्षेत्र में राष्ट्रीय एवं सामाजिक आवश्यकताओं को आत्मसात करते हुए निरंतर प्रगति पथ पर अग्रसर है। उन्होंने कहा कि गांधी जी ने कहा था कि जो शिक्षा चरित्रवान न बना सके, मन-इन्द्रियों को वश में रखने में सक्षम न बना सके, आत्म विश्वास न उत्पन्न कर सके, स्वावलम्बी न बना सके, उस शिक्षा में चाहें जितनी जानकारी का भंडार, तार्किक विशेषता अथवा पांडित्य हो वह अपूर्ण है।
उन्होंने कहा कि शिक्षा की सार्थकता इसमें निहित है कि वह उपयोगी और अनुपयोगी का विश्लेषण करने की क्षमता के फलस्वरूप अनुपयोगी को त्यागने तथा उपादेय को ग्रहण करने की दृष्टि का विकास करे तभी शिक्षा अपना अर्थ प्राप्त करेंगी। उन्होंने छात्र-छात्राओं से कहा कि आप की दृष्टि स्वः से ऊपर लोक कल्याण की होनी चाहिए। उन्होंने कहा कि विश्वविद्यालय इसी तरह आगे बढे ऐसी वह कामना करते है।
विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो0 एन0के0तनेजा ने विश्वविद्यालय की प्रगति आख्या रखते हुए बताया कि विश्विद्यालय 222 एकड़ भूक्षेत्र में विकसित है। विश्वविद्यालय में नवाचारी कार्यक्रमों के अन्तर्गत 40 यूनिट रेन वाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम कार्यरत है। विश्वविद्यालय प्रदश का पहला ऐसा संस्थान है जो कि सौर ऊर्जा से 1260 किलो वॉट विद्युत का उत्पादन करता है। विश्वविद्यालय परिसर में कूड़ा निस्तारण केन्द्र के लिए गार्बेज क्लीनिक के साथ एमओयू हस्ताक्षर किया गया है। विश्वविद्यालय से 1014 महाविद्यालय/संस्थान सम्बद्ध है। उन्होंने कुलाधिपति/राज्यपाल व मुख्य अतिथि के जीवन वृत्त पर भी प्रकाश ड़ाला।
इस अवसर पर कुलाधिपति/राज्यपाल आनंदीबेन पटेल ने वर्ष 2019 के लिए कला संकाय में डाक्टर आफ लेटर्स (डी0लिट) की उपाधि डा0 शशि शर्मा को प्रदान की। उन्हांने कला संकाय में 63 को पी0एच0डी0, 40 को एम0फिल0, 124 को कला निष्णात, 33 को स्नातक की, कृषि संकाय में 2 को पी0एच0डी0, 9 को एम0फिल0, 69 को कृषि निष्णात तथा वाणिज्य एवं व्यवसायिक प्रशासन संकाय में 3 को पी0एच0डी0, 60 को स्नातकोत्तर की उपाधि तथा शिक्षा संकाय में 16 को पी0एच0डी0, 13 को एम0एड0 व 26 को बी0पी0एड0 की उपाधि, अभियांत्रिकी एवं तकनीकी संकाय में 163 को तथा विधि संकाय में 1 को एल0एल0एम0 10 को बी0ए0एल0एल0बी0 तथा चिकित्सा संकाय में 1 की डी0एम0, 33 को एम0डी0, 13 को एम0एस0, 138 को एम0डी0एस0, 114 को एम0बी0बी0एस0 व 14 को डिप्लोमा प्रदान किया तथा विज्ञान संकाय में 17 को पी0एच0डी0, 204 को विज्ञान निष्णात, 21 को स्नातक की उपाधि प्रदान की।
इस अवसर पर कुलाधिपति/राज्यपाल आनंदीबेन पटेल ने वर्ष 2019 के लिए कुलाधिपति रजत पदक एम0कॉम की छात्रा कु0 दिव्या तेवतिया को तथा डा0 शंकर दयाल शर्मा स्वर्ण पदक, एम0फिल0 रसायन की छात्रा कु0 पूजा को तथा किसान ट्रस्ट नई दिल्ली द्वारा प्रायोजित पुरस्कारों में चौ0 चरण सिंह स्मृति प्रतिभा पुरस्कार में बी0एस0सी0 कृषि में प्रथम स्थान प्राप्त करने वाली शिवा चौधरी को 8000 रूपये पुरस्कार प्रशस्ति पत्र व स्मृति चिन्ह तथा बी0एस0सी0 कृषि में द्वितीय स्थान प्राप्त करने वाली शिवानी अहलावत को 6000 रूपये पुरस्कार प्रशस्ति पत्र व स्मृति चिन्ह प्रदान किए। उन्होंने प्रायोजित स्वर्ण पदक एवं पदक प्रमाण पत्र में विभिन्न संकायों में शैक्षणिक स्तर पर उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले 50 छात्र-छात्राओं को स्वर्ण पदक प्रदान किए तथा कुलपति स्वर्ण पदक एवं पदक प्रमाण पत्र तथा विशिष्ट योग्यता प्रमाण पत्र में 164 छात्र-छात्राओं को प्रदान किए तथा वर्ष 2018 के लिए 1 छात्रा को प्रायोजित स्वर्ण पदक तथा 5 छात्र-छात्राओं को कुलपति स्वर्ण पदक/पदक प्रमाण पत्र प्रदान किए।
इस अवसर पर कुलसचिव धीरेन्द्र कुमार वर्मा, प्रति कुलपति वाई0 विमला, जिलाधिकारी अनिल ढींगरा, मेडिकल कालिज के प्राचार्य डा0 आर0सी0गुप्ता सहित सभी संकायों के विभागाध्यक्ष, अन्य अधिकारीगण, गणमान्य लोग व छात्र-छात्राएं उपस्थित रहे।


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