वायु प्रदूषण आज एक वैश्विक समस्या बन गई है: मुख्यमंत्री


मुख्यमंत्री ने 'स्वच्छ वायु मोबाइल एप' का किया लोकार्पण
09 क्षेत्रीय पर्यावरण अनुश्रवण कंट्रोल रूम स्थापित किये जाने की घोषणा
लखनऊ।


उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि वायु प्रदूषण आज एक वैश्विक समस्या बन गई है। वायु प्रदूषण के निवारण के लिए आवश्यक है कि प्रकृति का दोहन कम से कम किया जाए। उन्होंने कहा कि भारतीय संस्कृति की अवधारणा पृथ्वी से लेकर अंतरिक्ष तक शान्ति की रही है। प्रकृति के साथ जीव का समन्वय जितना अच्छा रहेगा, हमारा जीवन उतना ही अच्छा होगा।
मुख्यमंत्री सोमवार को नेशनल क्लीन एयर प्रोग्राम के नेशनल नाॅलेज नेटवर्क की सहायता से प्रभावी क्रियान्वयन विषयक 02 दिवसीय कार्यशाला का शुभारम्भ करने के बाद अपने विचार व्यक्त कर रहे थे। उन्होंने कहा कि पर्यावरण को बेहतर करके ही लोगों को अच्छा स्वास्थ्य दिया जा सकता है। इसके दृष्टिगत आईआईटी कानपुर, पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय भारत सरकार, उत्तर प्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड एवं अन्य विभागों तथा संस्थाओं द्वारा इस कार्यशाला का आयोजन सराहनीय है।
इस अवसर पर मुख्यमंत्री ने 'स्वच्छ वायु मोबाइल एप' का लोकार्पण किया। इसके अलावा, मेरठ शहर के अन्तर्गत 03 स्वचालित सतत् परिवेशीय वायु गुणवत्ता अनुश्रवण केन्द्रों का शुभारम्भ भी किया। साथ ही, 09 क्षेत्रीय पर्यावरण अनुश्रवण कंट्रोल रूम स्थापित किये जाने की घोषणा की।
मुख्यमंत्री ने कहा कि संयुक्त राष्ट्र संघ ने भी सतत् विकास के 17 लक्ष्य निर्धारित किये हैं, इनमें से जलवायु परिवर्तन भी एक है। विश्व समुदाय के विकसित एवं विकाशील देशों द्वारा वायु प्रदूषण की विश्वव्यापी समस्या के निदान हेतु सतत् विकास की प्रक्रिया को अपनाया जा रहा है। उन्होंने कहा कि साॅलिड वेस्ट को वेल्थ में बदलने पर कार्य किये जाने की आवश्यकता है। उन्होंने इसके लिए अन्तर्विभागीय समन्वयन पर बल देते हुए कहा कि प्रयागराज कुम्भ-2019 में विभिन्न विभागों के समन्वयन से गंगा जी को अविरल व निर्मल बनाया गया। इस कार्य की पूरी दुनिया में सराहना हुई। सिंगल यूज प्लास्टिक के उपयोग को बन्द करने के लिए आदरणीय प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी जी द्वारा देश में एक प्रेरक अभियान प्रारम्भ किया गया है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि केन्द्र सरकार द्वारा संचालित उज्ज्वला योजना के माध्यम गरीब परिवारों को निःशुल्क एल0पी0जी0 गैस कनेक्शन दिये गये, जिससे बहुत हद तक प्रदूषण नियंत्रित करने में सफलता मिली। प्रदेश में वेक्टर जनित रोगों को नियंत्रित करने में 'स्वच्छ भारत मिशन' ने महत्वपूर्ण भूमिका निभायी है। स्वच्छ भारत मिशन, स्वच्छ पेयजल योजना और जनजागरूकता अभियान से इंसेफेलाइटिस रोग में 90 प्रतिशत तक की कमी आयी है। उन्होंने कहा कि कृषि अपशिष्टों को जलाने से रोकने के लिए किसानों को जागरूक किया जाना आवश्यक है। उन्होंने कहा कि पराली जलने से एक तरफ जहां उर्वरा शक्ति क्षीण होती है, वहीं दूसरी ओर वायु भी प्रदूषित होती है।
मुख्यमंत्री ने विभिन्न संस्थानों व राज्यों से आये लोगों से आह्वान किया कि विकास के लिए ऐसी तकनीक विकसित करें, जो पर्यावरण हितैषी हो। उन्होंने कहा कि वायु प्रदूषण पर प्रभावी नियंत्रण के लिए आवश्यक है कि इलेक्ट्रिक वाहनांे को बढ़ावा दिया जाये। पर्यावरण को बेहतर करने के उद्देश्य से इस वर्ष 09 अगस्त को प्रदेश में 22 करोड़ से अधिक पौधे रोपित किये गये। वर्ष 2020 में 25 करोड़ पौधे रोपित करने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि विश्व स्वास्थ्य संगठन ने देश के कुल 101 शहरों को प्रमुख वायु प्रदूषणकारी शहरों के रूप में चिन्हित किया है। इनमें से 15 शहर (आगरा, प्रयागराज, अनपरा, बरेली, फिरोजाबाद, गजरौला, गाजियाबाद, झांसी, कानपुर, खुर्जा, लखनऊ, मुरादाबाद, नोएडा, रायबरेली व वाराणसी) उत्तर प्रदेश में हैं। राज्य के सभी चिन्हित 15 शहरों के लिए वायु प्रदूषण नियंत्रण कार्ययोजना तैयार कर ली गयी है, जिसे केन्द्र सरकार द्वारा स्वीकृत भी कर दिया गया है। वर्तमान में सभी 15 शहरों में वायु प्रदूषण नियंत्रण कार्ययोजना प्रभावी रूप से लागू की जा रही है। इससे पूर्व, मुख्यमंत्री ने प्रदर्शनी का अवलोकन भी किया।
प्रदेश के पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्री दारा सिंह चैहान ने कहा कि प्रदूषित पर्यावरण आज एक विकट समस्या है। नेशनल क्लीन एयर प्रोग्राम के तहत चिन्हित प्रदेश के 15 प्रदूषित शहरों की वायु गुणवत्ता के लिए एयर क्वालिटी माॅनिटरिंग कमेटी गठित की गई है। इस अवसर पर पर्यावरण राज्य मंत्री अनिल शर्मा ने कार्यक्रम में आये सभी लोगों को धन्यवाद ज्ञापित किया।
इस अवसर पर केन्द्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के चेयरमैन एसपीएस परिहार, प्रमुख सचिव पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन कल्पना अवस्थी, पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय, भारत सरकार में संयुक्त सचिव निधि खरे, आईआईटी, कानपुर के निदेशक प्रो0 अभय करांदिकर, संस्थान के विभागाध्यक्ष सिविल इंजीनियरिंग प्रो0 एसएन त्रिपाठी मौजूद थे।


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