डॉ0 शकुन्तला मिश्रा राष्ट्रीय पुनर्वास विश्वविद्यालय का छठवां दीक्षान्त समारोह सम्पन्न

दिव्यांगों के प्रति करूणा से ज्यादा कृतज्ञता का भाव होना चाहिए : राज्यपाल
लखनऊ।


उत्तर प्रदेश की राज्यपाल एवं कुलाधिपति आनंदीबेन पटेल ने डॉ0 शकुन्तला मिश्रा राष्ट्रीय पुनर्वास विश्वविद्यालय, लखनऊ के छठवें दीक्षान्त समारोह को सम्बोधित करते हुए कहा कि दिव्यांगों के अन्दर प्रकृति प्रदत्त एक विशिष्ट प्रतिभा और रचनात्मकता होती है। उन्होंने कहा कि हमारा प्रयास ऐसे दिव्यांग समूह जो अपनी नैसर्गिक प्रतिभा और दिव्य दृष्टि के बावजूद समाज के हासिये पर छूट गया था, को बाधा रहित, अनुकूल एवं सुगम परिवेश प्रदान करना होना चाहिए। उन्हें शिक्षण-प्रशिक्षण एवं कौशल विकास के अवसर उपलब्ध कराये जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि हमारे भीतर उनके प्रति करूणा से ज्यादा कृतज्ञता का भाव होना चाहिए।
राज्यपाल ने कहा कि वंचित और अक्षम लोगों को नजरंदाज करके आर्थिक विकास के चाहे जितने रास्ते खुलते हों, वे किसी राष्ट्र के समग्र विकास के रास्ते कतई नहीं हो सकेंगे, क्योंकि सभ्यता और राष्ट्र के उत्थान एवं उन्नयन का रास्ता सही मायने में वंचित और उपेक्षित समुदायों के बीच से होकर ही गुजरता है। उन्होंने कहा कि सिर्फ शिक्षा ही नहीं, जीवन के अन्य क्षेत्रों में भी सबके लिए समान अवसरों की उपलब्धता स्वतंत्रता संघर्ष का एक बड़ा 'विजन' रहा है।
आनंदीबेन पटेल ने डॉ0 शकुन्तला मिश्रा राष्ट्रीय पुनर्वास विश्वविद्यालय की सराहना करते हुए कहा कि यह विश्वविद्यालय दिव्यांग समुदाय को गुणवत्तापरक उच्च शिक्षा, प्रशिक्षण एवं पुनर्वास के माध्यम से समाज और विकास की मुख्य धारा से जोड़ने का अनुकरणीय कार्य कर रहा है। उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय और सामाजिक विकास की किसी भी अवधारणा में जो अब तक उपेक्षित थे, हासिये पर पड़े रह गये थे, वही दिव्यांग और वंचित समूह आज इस विश्वविद्यालय के केन्द्र में हैं। समावेशी शिक्षा के प्रयोग से दिव्यांग समुदाय लाभान्वित हो रहा है। उन्होंने कहा कि यह विश्वविद्यालय निःशक्तता के अलग-अलग पक्षों पर शोध करते हुए अपने निष्कर्षों से सरकार को अवगत कराये, जिससे दिव्यांगों के विकास, सशक्तीकरण एवं पुनर्वास संबंधी योजनाओं को ठोस, प्रभावी और पारदर्शी ढंग से क्रियान्वित किया जा सके।
राज्यपाल ने दीक्षान्त समारोह के अवसर पर 1001 उपाधि एवं पदक प्राप्त विद्यार्थियों को बधाई देते हुए कहा कि आप सभी जीवन के विभिन्न क्षेत्रों में अपने उत्कृष्ट कार्यों द्वारा राष्ट्र-निर्माण एवं मानवता के हित में योगदान दें। उन्होंने कहा कि हम सभी का दायित्व है कि विश्व के मानचित्र पर भारत को एक महत्वपूर्ण, प्रभावशाली एवं श्रेष्ठ राष्ट्र बनाने में स्वयं को तथा अपने संसाधनों को अर्पित करें।
राज्यपाल ने अपने सम्बोधन से पहले विभिन्न विषयों में सर्वोच्च अंक हासिल करने वाले छात्र-छात्राओं को पदक एवं उपाधि प्रदान कर सम्मानित किया। उन्होंने इस अवसर पर विश्वविद्यालय की ओर से जगत्गुरू रामभद्राचार्य तथा भगवान महावीर विकलांग सहायता समिमि, जयपुर के संस्थापक पद्म भूषण देवेन्द्र राज मेहता को डी0 लिट की मानद उपाधि प्रदान कर सम्मानित किया।
इससे पहले विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो0 राणा कृष्ण पाल सिंह ने विश्वविद्यालय का वार्षिक प्रतिवेदन प्रस्तुत किया। इस अवसर अपर मुख्य सचिव दिव्यांगजन सशक्तिकरण महेश कुमार गुप्ता, विश्वविद्यालय के कुलसचिव अमित कुमार सिंह, सामान्य परिषद, कार्य परिषद एवं विद्या परिषद के सदस्यगण, शिक्षकगण, अधिकारी एवं कर्मचारी, छात्र-छात्राओं सहित अन्य गणमान्य लोग भी उपस्थित थे।
दिव्यांगता अभिशाप नहीं, प्रसाद है : रामभद्राचार्य
मुख्य अतिथि रामभद्राचार्य दिव्यांग विश्वविद्यालय, चित्रकूट के संस्थापक एवं कुलाधिपति जगद्गुरू रामभद्राचार्य ने दीक्षान्त समारोह में अपने आशीर्वचन के रूप में कहा कि दिव्यांगता अभिशाप नहीं, प्रसाद है। इससे आन्तरिक शक्ति का पता चलता है। उन्होंने कहा कि दिव्यांग क्या नहीं कर सकता है। उन्होंने छात्रों से कहा कि शिक्षा की गरिमा को पहचानिए। राष्ट्र को देवता मानते हुए अपने कर्म से भगवान की पूजा करें, यही राष्ट्र प्रेम है।
प्रकृति की विशेष संतान हैं दिव्यांग लोग : मंत्री
समारोह में दिव्यांगजन सशक्तीकरण एवं पिछड़ा वर्ग कल्याण मंत्री अनिल राजभर ने कहा कि दिव्यांग लोग प्रकृति की विशेष संतान हैं। जब दिव्यांग एवं सामान्य छात्रों को एक साथ देखता हूँ तो मुझे गौरव की अनुभूति होती है। उन्होंने कहा कि दिव्यांगों की विशेष स्थिति को देखते हुए ही प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने आप लोगों को दिव्यांग नाम दिया है।


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