केजीएमयू की कार्यशाला में सर्जरी के बारे में जानकारी का हुआ अदान-प्रदान

लखनऊ।

किंग जाॅर्ज चिकित्सा विश्वविद्यालय के दंत संकाय विभाग की इम्प्लांट यूनिट, ओरल एवं मैक्सिलोफेशियल सर्जरी विभाग, प्रोस्थोडोंटिक्स विभाग तथा पेरियोडोंटोलाॅजी विभाग द्वारा संयुक्त तत्वावधान में बुद्धवार को ''वुड-हीलिंग, पेरी इम्प्लान्टीटिस एण्ड इम्प्लान्ट प्रोस्थीसिस'' विषय पर दो दिवसीय कार्यशाला का आयोजन किया गया। इस अवसर पर कार्यक्रम के मुख्य अतिथि चिकित्सा संस्थान के मा0 कुलपति प्रो0 एमएलबी भटट् तथा अधिष्ठाता, दंत संकाय विभाग डाॅ0 शादाब मोहम्मद ने दंत संकाय विभाग को इम्प्लांटोलाॅजी के क्षेत्र में उत्कृष्ट कार्य किए जाने पर बधाई देते हुए कहा कि इस कार्यशाला के माध्यम से इम्प्लांट मेनटेनेंस, पेरी इंप्लाटिस, डेंटिनल बोन ग्राफ्ट जैसी विभिन्न सर्जरी के बारे में जानकारी का अदान-प्रदान होगा जोकि इम्प्लांट के स्थायित्व को बढ़ाने के साथ ही इसमें होने वाले लागत को भी कम करेगा।
कार्यशाला के अतिथि वक्ता डाॅ0 लंका महेश ने बोन ग्राफ्टर के बारे में जानकारी देते समझाया कि किस प्रकार से इम्प्लांट और प्राकृतिक दांत के आसपास कौन से बोन ग्राफ्ट का प्रयोग किया जाए। इस अवसर पर डाॅ0 संदीप सिंह ने (पीआरएफ) प्लेटलेट रिच फाइब्रीन तथा डेंटिनल ग्राफ्ट के उपयोग की विधि के बारे में जानकारी दी। इसके साथ ही केजीएमयू दंत संकाय विभाग के डाॅ0 अंजनी कुमार पाठक ने पेरी इम्प्लान्टीटिस के बारे में और उससे कैसे बचा जा सकता है, इसके बारे में जानकारी दी।
इस अवसर पर केजीएमयू दंत संकाय विभाग के डाॅ0 लक्ष्य कुमार ने इम्प्रेशन तकनीकि तथा किस प्रकार से इम्प्लांट के ऊपर दांत लगाएं जाएं इसके बारे में कार्यशाला में प्रतिभाग करने वाले दंत चिकित्सकों को समझाया। इसके साथ ही नीदरलैण्ड से आए अतिथि वक्ता डाॅ0 इरफान अब्बास ने इम्प्लांट के बारे में विस्तार से जानकारी दी। केजीएमयू सर्जरी विभाग के डाॅ0 अरूणेश कुमार तिवारी ने एनेस्थीसिया और सर्जिकल तकनीकि के साथ ही डेंटल इमरजेंसी के बारे में उक्त कार्यशाला में जानकारी दी।


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