विकास खण्ड स्तरीय गोष्ठियों का आयोजन

उन्नाव 


आज सबमिशन आॅन एग्रीकल्चर एक्सटेंशन येाजना के अन्तर्गत विकास खण्ड स्तरीय गोष्ठियों का आयोजन विकास खण्ड, नवाबगंज, मिंयागंज, औरास, हसनगंज में किया गया। गोष्ठियों में कृषि विश्वविद्यालय कानपुर के वैज्ञानिक डा0 एस0पी0 त्यागी,  डा0 एन0एस0 हुसैन, कृषि विज्ञान केन्द्र धौरा के वैज्ञानिक डा0 ए0के0 सिंह, डा0 रतना सहाय, डा0 रमेश मौर्या, खण्ड विकास अधिकारी मिंयागंज एवं कृशि विभाग के अधिकारियों ने उपस्थित होकर उन्नत कृषि तकनीकी एवं योजनाओं की जानकारी दी। विकासखण्ड मिंयागंज में गोष्ठी का शुभारंभ माननीय विधायक बंबालाल दिवाकर ने किया, उन्होंने कृषकों को सरसों मिनीकिट बीज वितरण भी किया। कृषकों को सम्बोधित करते हुये विधायक ने कहा कि सरकार किसानों को 50 प्रतिशत से 100 प्रतिशत अनुदान पर रबी बीज दे रही है। कृषि यंत्र और सिंचाई के यंत्रों पर भी 50 से 90 प्रतिशत तक का अनुदान दिया जा रहा है, किसान भाई कृषि विभाग से जुड़कर योजनाओं का लाभ लें और अपनी आर्थिक और सामाजिक स्थिति में सुधार लायें, उन्होंने किसान से आहवान किया कि वह अपने बच्चों की शिक्षा पर विशेष ध्यान दें। उन्होंने कहा कि सरकार ने किसान के हित  में धान का समर्थन मूल्य 1820 रूपया प्रति कु0 की दर से निर्धारित किया है। उन्होंने किसानों से बैंक जाकर किसान के्रडिट कार्ड बनवाने को कहा जिससे 04 प्रतिशत ब्याज पर खेती-किसानी के लिये धनराशि प्राप्त होगी और उनकी फसल का प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना के अन्तर्गत बीमा भी हो जायेगा।
उप कृषि निदेशक ने बताया कि किसान भाई फसल अवशेष को खेत में न जलायें , उसे खेत में ही जुताई कर सड़ाये। फसल अवशेष जलाना दण्डनीय अपराध घोषित है और इसके लिये लेखपाल और सहायक विकास अधिकारी(कृषि) द्वारा सतत् क्षेत्र भ्रमण किया जा रहा है। उन्होनें नवम्बर माह में ही गेंहॅू की बोवाई लाइन से करने की सलाह दी, उन्होंने यह भी कहा कि अच्छी भूमि में बोवाई 21 दिन के बाद और ऊसरीली भूमि में बोवाई 28 दिन के बाद पहला पानी लगायें और संतुलित मात्रा में कार्बनिक खाद्य और उर्वरक का प्रयोग करें। पी0एम0 किसान सम्मान निधि की जानकारी हेतु किसान pmkisan.gov.in  मोबाइल या कम्प्यूटर में टाइप कर आधार संख्या इन्ट्री कर जानकारी प्राप्त कर सकते है और खाता संख्या संशोधन का कार्य बीज भण्डार पर या तहसील में जाकर शीघ्र करा लें। उन्होंने किसानों को कहा कि जहंा कीड़े, बीमारी या प्राकृति आपदा से फसल क्षतिग्रस्त हुयी है, उस क्षेत्र में किसान अपने क्षेत्र के लेखपाल से सम्पर्क कर अपनी देखरेख में क्राप कटिंग अवश्य करा लें।  
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