अरुंधति का बयान देश से विश्वासघात : शिवराज


भोपाल।


बुकर पुरस्कार विजेता अरुंधति रॉय के विवादित बयान को लेकर सियासत गरम हो गई है। मध्यप्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री और भाजपा के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष शिवराज सिंह चौहान ने अरुंधति रॉय के बयान को देश से विश्वासघात बताते हुए कहा कि ऐसे बुद्धिजीवियों के लिए भी एक रजिस्टर बनाना चाहिए। शिवराज ने लेखिका अरुधंति रॉय के बयान पर पलटवार करते हुए कहा कि अगर यही हमारे देश के बुद्धिजीवी है, तो पहले हमें ऐसे बुद्धिजीवियों का रजिस्टर बनाना चाहिए। शिवराज ने रजिस्टर अलग बताने का कारण बताते हुए कहा कि ये सदैव देश के हितों के खिलाफ बोलते हैं।


शिवराज ने अरुंधती के छात्रों से राष्ट्रीय जनसंख्या रजिस्टर में गलत नाम लिखाने की अपील करने को विश्वासघात और देश की सुरक्षा से खिलवाड़ बताते हुए कहा कि यह आम जनता को मिलने वाली सुविधा से वंचित करने का प्रयास है। शिवराज ने कहा कि ऐसे बुद्धिजीवियों ने पहले परमाणु परीक्षण और किसानों को पानी देने के लिए बनाए जाने वाले बांधों का विरोध किया और अब देश की संसद से बनाए गए कानून का विरोध कर रहे हैं, जो विश्वासघात नहीं तो और क्या है?


शिवराज ने उलटे अरुधंति रॉय से सवाल करते हुए कहा कि जब उन्हें बुकर पुरस्कार मिला था तो उन्होंने अपना नाम क्या लिखवाया था? उन्होंने कहा कि ऐसे बयानों से भारतविरोधी ताकतों को बढ़ावा मिलता है और ये पाकिस्तान जैसे देशों को भारत के खिलाफ मजबूती देते हैं। शिवराज ने कहा कि ऐसे बयान विश्वासघात हैं और ऐसे विश्वासघातियों की पहचान होनी चाहिए और उनका अलग से रजिस्टर बनना चाहिए।


अरुंधति रॉय पर क्यों बिफरे शिवराज? : बुधवार को CAA के विरोध में दिल्ली यूनिवर्सिटी में छात्रों के विरोध प्रदर्शन के बीच पहुंचीं लेखिका और सामाजिक कार्यकर्ता अरुंधति रॉय ने NPR का विरोध करते हुए कहा कि जब आपके NPR के लिए सरकारी कर्मचारी जानकारी मांगने आपके घर आएं तो उन्हें अपना नाम रंगा, बिल्ला या अन्य कोई दूसरा बताइए। वहीं उन्होंने लोगों से अपने घर का पता 7, रेसकोर्ड रोड और मोबाइल नंबर भी गलत बताने को कहा था जिसके बाद से वे भाजपा नेताओं के निशाने पर आ गई हैं


Popular posts from this blog

स्वरोजगारपरक योजनाओं के अंतर्गत ऑनलाइन ऋण वितरण मेले का किया गया आयोजन

मंत्र की उपयोगिता जांचें साधना से पहले

’’पवन गुरू, पानी पिता, माता धरति महत’’ को अपने जीवन का अंग बनायें : स्वामी चिदानन्द सरस्वती