दिशा-निर्देशों का उल्लंघन करते नए स्कूल

रविंदर कुमार शर्मा


लेखक, घुमारवीं से हैं


आज भी इन्फ्रास्ट्रक्चर की कमी होने के बावजूद सरकारी स्कूलों में पढ़ने वाले बच्चे अपना लोहा मनवा रहे हैं! इसके पीछे सरकारी स्कूलों में प्रशिक्षित स्टाफ  का होना है! सरकारी स्कूलों का प्राइवेट स्कूलों के साथ मुकाबला करना तर्कसंगत नहीं है क्योंकि सारे प्राइवेट स्कूलों में अच्छे नंबर वालों को ही दाखिला मिलता है! प्राइवेट स्कूल अच्छे बच्चों को लपकने की फिराक में रहते हैं ताकि उनकी मैरिट आने से स्कूल का नाम बना रहे…
हिमाचल प्रदेश में ही नहीं बल्कि पूरे भारतवर्ष में प्राइवेट स्कूल कुकरमुत्तों की तरह खुल रहे हैं! बजाय सरकारी स्कूलों में पढ़ाने के अधिकतर लोग प्राइवेट स्कूलों में अपने बच्चों को पढ़ाना पसंद करते हैं! ऐसा कहा जाता है कि प्राइवेट स्कूलों में पढ़ाई बहुत अच्छी होती है, लेकिन इसमें कोई सच्चाई नहीं है! आज भी इन्फ्रास्ट्रक्चर की कमी होने के बावजूद सरकारी स्कूलों में पढ़ने वाले बच्चे अपने लोहा मनवा रहे हैं! इसके पीछे सरकारी स्कूलों में प्रशिक्षित स्टाफ  का होना है! सरकारी स्कूलों का प्राइवेट स्कूलों के साथ मुकाबला करना तर्कसंगत नहीं है क्योंकि सारे प्राइवेट स्कूलों में अच्छे नंबर वालों को ही दाखिला मिलता है! प्राइवेट स्कूल अच्छे बच्चों को लपकने की फिराक में रहते हैं ताकि उनकी मैरिट आने से स्कूल का नाम बना रहे, जबकि सरकारी स्कूलों में सभी गरीब तबके के बच्चों को सामाजिक दायित्व के अंतर्गत दाखिला दिया जाता है! हिमाचल प्रदेश में पिछले कुछ समय से प्राइवेट स्कूलों में काफी वृद्धि दर्ज की गई है! हिमाचल प्रदेश में भी इन स्कूलों को खोलने के लिए सरकार से अनुमति व हिमाचल प्रदेश स्कूल शिक्षा बोर्ड या अन्य बोर्डों से मान्यता लेनी पड़ती है! अगर सही में देखा जाए तो बहुत से प्राइवेट स्कूल ऐसे हैं जो सरकार द्वारा निर्धारित मानदंडों पर खरा नहीं उतरते हैं बावजूद इसके वह स्कूल चल रहे हैं! काफी स्कूलों में बच्चों के बैठने की भी उचित व्यवस्था नहीं है, बच्चों के खेलने के लिए ग्राउंड भी नहीं हैं, लेकिन फिर भी इन स्कूलों को मान्यता मिल जाती है! प्रदेश में चल रहे स्कूलों को यदि देखा जाए तो अधिकतर स्कूलों के पास बच्चों के खेलने के लिए ग्राउंड के लिए उतनी जगह नहीं है जितनी आवश्यक है! बोर्ड के दिशानिर्देशों के अनुसार हर स्कूल में 250 बच्चों पर कम से कम 400 स्क्वेयर मीटर का ग्राउंड स्कूल से उचित दूरी पर होना चाहिए! अधिकतर स्कूलों में यह सुविधा भी उपलब्ध नहीं है! स्कूलों के कमरे भी उस साइज के नहीं हैं जो हिमाचल प्रदेश स्कूल शिक्षा बोर्ड द्वारा निर्धारित किए गए हैं! शिक्षा बोर्ड द्वारा निर्धारित मापदंडों के अनुसार प्रत्येक स्कूल के हाजिरी रजिस्टर पर बच्चों की संख्या के अनुसार प्रत्येक बच्चे के लिए कम से कम आधा स्कवेयर मीटर स्थान होना चाहिए जो कि किसी भी स्कूल में उपलब्ध नहीं होगा! अधिकतर प्राइवेट स्कूल किराए के भवनों में चल रहे हैं यदि अपने भवन हैं भी तो छोटे हैं!


क्लास रूम ज्यादा बना दिए गए हैं ताकि दिखाया जा सके कि हर क्लास के लिए अलग कमरे की व्यवस्था है! जो भवन इन स्कूलों द्वारा किराए पर लिए गए हैं वह स्कूल के हिसाब से नहीं बने हैं! अतः बोर्ड के मापदंडों का उल्लंघन हो रहा है! सबसे बड़ी बात यह है कि जब विभाग का कोई अधिकारी इन स्कूलों के निरीक्षण पर आता है तो क्या वह इन सब बातों पर ध्यान देता है कि स्कूल के पास अपना क्या क्या इन्फ्रास्ट्रक्चर है या फिर खानापूर्ति करके कागजों का पेट भर दिया जाता है! इन प्राइवेट स्कूलों में से लगभग सभी स्कूलों में सहशिक्षा है, लेकिन सबसे बड़ी समस्या लड़कों व लड़कियों के टॉयलेट की है! लगभग सभी स्कूलों में टॉइलेट छात्रों की संख्या के हिसाब से कम हैं! विश्व स्वास्थ्य संगठन के अनुसार 25 लड़कियों के लिए व 30 लड़कों के लिए एक टॉयलेट होना चाहिए! प्राइवेट स्कूलों की तो बात ही क्या यहां सरकारी स्कूलों में भी टॉयलेट की संख्या बच्चों के हिसाब से कम है! सभी स्कूलों में फायर सेफ्टी के लिए भी कोई कारगर कदम नहीं उठाए हैं जिससे यदि कोई आग की घटना हो जाती है तो बच्चों को कैसे बचाया जाए! यह स्कूल प्रतिवर्ष अपनी फीस बढ़ा कर बच्चों के अभिभावकों पर बोझ डाल देते है, लेकिन सरकार इस मामले मे कुछ भी नहीं करती है! दिल्ली सरकार द्वारा इन प्राइवेट स्कूलों द्वारा बढ़ाई जा रही फीस पर अंकुश लगाया है तथा बढ़ी हुई फीस अभिभावकों को वापस भी करवाई गई है! हिमाचल सरकार को भी दिल्ली सरकार का इस मामले में अनुसरण करना चाहिए! सरकार को इन स्कूलों का ऑडिट करवाना चाहिए तथा देखना चाहिए कि इतनी अधिक फीस होने के बावजूद इन स्कूलों में इन्फ्रास्ट्रक्चर की कमी क्यों है। इनमे कार्यरत सभी अध्यापकों का अकेडेमिक रेकॉर्ड,  अध्यापकों को कितना वेतन दिया जा रहा है, बिल्डिंग फंड के नाम पर कितना पैसा बटोरा जा रहा है, यह सब जांच का विषय है! बच्चों के अविभावक तो एक मोहरा बन गए हैं क्योंकि उन्हें तो अपने बच्चों को किसी भी कीमत पर पढ़ाना है और इन स्कूलों की मनमानी के आगे वे बेबस नजर आते हैं! सरकार को चाहिए कि प्राइवेट स्कूलों की फीस पर भी एक पॉलिसी बनाई जाए जिसमें सभी स्कूलों के लिए सुविधाओं के हिसाब से एक जैसा फीस का ढांचा बनाया जाए, स्कूल बसों के लिए भी नियम बनाए जाएं जिनमें यह साफ  हो कि बच्चों से प्रति किलोमीटर कितना पैसा लिया जाना चाहिए!


इन स्कूलों में अभिभावकों द्वारा बच्चों को लाने ले जाने के लिए जो छोटी गाडियां लगाई गई हैं उनमे बच्चों को ठूंस-ठूंस कर भरा जाता है जो इन बच्चों के साथ ज्यादती है! इस पर भी अंकुश लगाने की आवश्यकता है तथा पुलिस को अपनी जिम्मेदारी निभाते हुए जहां पर नियमों का उलंघन करके क्षमता से अधिक बच्चों को गाडि़यों में ठूंसा जा रहा हो, तुरंत आवश्यक कार्यवाही करनी चाहिए! स्कूल के कमरों व ग्राउंड के लिए बनाए गए नियमों का कड़ाई से पालन होना चाहिए तथा नियमों की अनुपलना न करने वाले स्कूलों की मान्यता रद्द कर दी जानी चाहिए! जिस तरह से सरकारी स्कूलों में गरीब बच्चों को निशुल्क शिक्षा का प्रावधान किया गया है उसी तरह इन स्कूलों को भी मान्यता देते समय कुल दाखिले का कुछ प्रतिशत गरीब बच्चों के आरक्षित रखने पर ही मान्यता देनी चाहिए! सरकार को यह भी सुनिश्चित करना चाहिए कि प्राइवेट स्कूलों में केवल अमीर या अच्छे नंबरों में पास हुए बच्चों को ही दाखिला न मिले बल्कि सभी बच्चों को दाखिला मिल सके! सरकारी स्कूलों की हालत भी कोई खास अच्छी नहीं है! प्राथमिक पाठशालाओं की यदि बात करें तो प्रदेश के 12 जिलों में स्थित कुल 10,623 प्राथमिक स्कूलों में से ऐसे 441 स्कूल हैं जिनमें मात्र एक क्लास रूम है तथा 4 स्कूल ऐसे हैं जो बिना क्लास रूम के चल रहे हैं। इसके अलावा कुल 1969 मिडल स्कूलों में 263 ऐसे स्कूल हैं जिनमें केवल एक कमरा है तथा 4 स्कूल ऐसे हैं जो बिना कमरे के हैं! यूनिफाइड डिस्ट्रिक्ट इन्फार्मेशन सिस्टम फॅर एजुकेशन की वर्ष 2018-19 की रिपोर्ट में यह खुलासा हुआ है! यह डाटा 30 सितंबर 2018 तक के आंकड़ो के अनुसार है! लोगों का मानना है कि यदि सरकार बजाए नए स्कूल खोलने के वर्तमान सरकारी स्कूलों में शिक्षा की गुणवत्ता व अच्छे इन्फ्रास्ट्रक्चर पर ध्यान दे तो सरकारी स्कूल निजी स्कूलों से कहीं बेहतर कार्य कर सकते हैं!


Popular posts from this blog

स्वरोजगारपरक योजनाओं के अंतर्गत ऑनलाइन ऋण वितरण मेले का किया गया आयोजन

भारत विदेश नीति के कारण वैश्विक शक्ति बनेगा।

बांसडीह में जाति प्रमाण पत्र बनाने को लेकर दर्जनों लोगों ने एसडीएम को सौपा ज्ञापन