सतोपंथ झील


उत्तराखंड की धरती पर तमाम ऐसी जगहें हैं, जिनका इतिहास हमारे धार्मिक ग्रंथों से जुड़ा है। ऐसी ही एक बेहद खास जगह है सतोपंथ झील। यह चौखंभा शिखर की तलहटी पर बसी हिमरूप झील है। इसके साथ महाभारत काल की घटनाओं का ताल्लुक बताया जाता है। आइए जानते हैं सतोपंथ झील के रहस्य के विषय में…
स्वर्ग जाने का रास्ता सतोपंथ झील- सतोपंथ यानी कि सत्य का रास्ता। मान्यता है कि महाभारत काल में पांडव इसी रास्ते से स्वर्ग की ओर गए थे। यही वजह है कि इस झील का नाम सतोपंथ पड़ गया। इसके अलावा यह भी भी बताया जाता है कि जब पांडव स्वर्ग की ओर जा रहे थे और एक-एक करके उनकी मृत्यु हो रही थी, तो इसी स्थान पर भीम की मृत्यु हुई थी। इसलिए भी इस जगह का महत्त्व माना गया है।


पांडवों के स्नान-ध्यान का मिलता है जिक्र-पौराणिक कथाओं के अनुसार पांडवों ने स्वर्ग जाने के रास्ते में इसी पड़ाव पर स्नान-ध्यान किया था। इसके बाद ही उन्होंने आगे का सफर तय किया था। इसलिए भी इसे अत्यंत पवित्र झील माना गया है। इसके अलावा एक यह भी कथा मिलती है कि इसी स्थान पर धर्मराज युधिष्ठिर के लिए स्वर्ग तक जाने के लिए आकाशीय वाहन आया था।


रहस्यमयी है झील का आकार-अभी तक आपने गोल या फिर लंबाई के आकार वाली झील देखी होगी,लेकिन सतोपंथ झील का आकार तिकोना है। मान्यता है कि यहां पर एकादशी के पावन अवसर पर त्रिदेवों ब्रह्मा, विष्णु और महेश ने अलग-अलग कोनों पर खड़े होकर ड़बकी लगाई थी। इसलिए इसका आकार त्रिभुजाकार यानी कि तिकोना है। झील के आकार की ही तरह इसके अस्तित्व को लेकर भी कई मान्यताएं हैं। इनमें से एक यह है कि सतोपंथ में जब तक स्वच्छता रहेगी, तब तक ही इसका पुण्य प्रभाव रहेगा। यही वजह है कि झील के रखरखाव का काफी ख्याल रखा जाता है। सतोपंथ झील के आगे ही स्वर्ग जाने का रास्ता-सतोपंथ झील से कुछ दूर आगे चलने पर ग्लेशियर नजर आता है। जिसे स्वर्ग जाने का रास्ता भी कहा जाता है। कहा जाता है कि इस ग्लेशियर पर ही सात सीढि़यां हैं,जो कि स्वर्ग जाने का रास्ता है। हालांकि इस ग्लेशियर पर अमूमन तीन सीढि़यां ही नजर आती हैं। बाकी बर्फ और कोहरे की चादर से ढकी हैं।


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