असम में रंगापारा में वोटर्स पार्टी इंटरनेशनल द्वारा राजनीति सुधारकों की चार दिवसीय ट्रेनिंग का आयोजन


रंगापारा सोनितपुर- असम


सकल घरेलू उत्पाद अन्य चीजों के अलावा प्राकृतिक संसाधनों के कारण भी बनता है। जिस के बदले सरकार करेंसी नोट छपती है। लेकिन इस करंसी नोट को कथित रूप से बुद्धिमान और धनवान लोग यह कहकर हड़प लेते हैं कि यह मेरी है। मैं अधिक बुद्धिमान हूं। मैं अधिक परिश्रमी हूं और मैंने निवेश किया है। किंतु यह अन्याय है। क्योंकि प्रकृति योग्यता के आधार पर भेदभाव नहीं करती। इसलिए यह नोट सभी वोटरों में बिना शर्त बांटने का कानून बनना चाहिए। इसी को वोटरशिप कहा जाता है।


उक्त बातें वोटर्स पार्टी इंटरनेशनल के नीति निर्देशक विश्वात्मा भरत गांधी ने राजनीति सुधारकों के चार दिवसीय प्रशिक्षण शिविर को संबोधित करते हुए रंगापारा में कहा। शिविर कमला थियेटर में चल रहा है। 700 लोगों की क्षमता का यह थिएटर बालकनी सहित पूरा खचाखच भरा है। इस शिविर का आयोजन पार्टी के सोनितपुर जिला कमेटी ने किया है।


उन्होंने आगे कहा कि जंगलों की लकड़ियों, फलों, जड़ी बूटियों, समुद्र की मछलियों, धूप, बारिश, धरती की स्वयं की मौजूदगी, खनिज पदार्थों आदि के कारण सरकार हर महीना अरबों रुपया छापती है किंतु सकल घरेलू उत्पाद में प्राकृतिक पैदावार का अलग से आकलन जानबूझकर नहीं करती। इसके कारण यह नोट कथित रूप से बुद्धिमानों और धनवनों के बीच बंट जाती है बाकी 95 प्रतिशत लोग कोई हिस्सेदारी नहीं पाते। जबकि सूरज बुद्धिमान और धनवान व्यक्ति को अधिक धूप नहीं देता और आसमान इन लोगों को अधिक बारिश नहीं देता। धरती बुद्धि और धन के आधार पर लोगों के बीच भेदभाव नहीं करती। लेकिन जब प्राकृतिक पैदावार के बदले नोट छापी जाती है तो सरकार इसलिए भेदभाव करती है क्योंकि सरकार के संचालन में मध्यम वर्ग और निम्न आर्थिक वर्ग के कोई प्रतिनिधित्व नहीं होता। इसलिए आवश्यक है इस कम अमीरी गरीबी के आधार पर समाज के पांच मंजिलें दार वर्ग किए जाएं और सभी वर्गों को सरकार में संसद में और न्यायालयों में प्रतिनिधित्व देने के लिए आरक्षण मिले।


श्री विश्वात्मा भरत गांधी ने कहा है कि वैश्वीकरण के इस युग में नागरिकता तय करने का अधिकार सरकारों के पास नहीं छोड़ा जा सकता। उन्होंने बताया कि प्रत्येक व्यक्ति के प्रेम की भौगोलिक परिधि समान नहीं होती। किसी व्यक्ति को केवल अपने परिवार से प्रेम होता है और किसी दूसरे व्यक्ति को अपने गांव या अपनी जाति से प्रेम होता है। जबकि अन्य व्यक्ति को पूरे देश से प्रेम होता है लेकिन आज्ञा चक्री लोगों को संपूर्ण विश्व से प्रेम होता है।


उन्होंने कहा कि मानव मन के इस प्राकृतिक वर्गीकरण के कारण व्यक्ति के प्रेम की भौगोलिक परिधि क्या है, यह वह  व्यक्ति स्वयं ही जान सकता है। सरकार नहीं जान सकती। ऐसी स्थिति में सरकार किसी व्यक्ति की नागरिकता कैसे तय कर सकती है? कोई व्यक्ति पूरे विश्व से प्रेम करता है तो उसको किसी एक देश की नागरिकता लेने के लिए बाध्य कैसे कर सकती हैं?


आगे उन्होंने कहा कि कौन कहां की नागरिकता धर्म और आस्था जैसे व्यक्ति की निजी और अंतरात्मा की चीज है इस सरकार की संस्था कैसे पहचान सकती हैं? व्यक्ति की नागरिकता तय करने के मामले में सरकारों को प्राप्त अधिकार वैसा ही अधिकार है जैसे सरकार है व्यक्तियों के धर्म तय करने लगे और उनको यह निर्देश जारी करने लगे कि तुम हिंदू बनो या मुसलमान या किसी अन्य धर्म का अनुयाई बनो। श्री विश्वात्मा ने कहा कि जिस प्रकार व्यक्ति का  धर्म तय करना सरकार का अधिकार नहीं हो सकता, उसी प्रकार व्यक्ति की नागरिकता तय करना भी सरकार का अधिकार नहीं हो सकता।


राजनीतिक सुधारों पर दर्जनों पुस्तकों के लेखक विश्वात्मा भरत गांधी ने कहा कि नागरिकता के संबंध में पूरा संसार राजनीतिक अंधविश्वास से ग्रस्त है। उन्होंने कहा कि नागरिकता का जो वर्तमान अर्थ है यह यूरोप में 17वीं और 18वीं शताब्दी में तब पैदा हुआ जब सभ्यता और संस्कृति भौगोलिक सीमाओं कैद  रहने के लिए अभिशप्त थी। मानवीय संबंध प्रत्यक्ष संपर्क के अधीन था। किंतु आज इंटरनेट मोबाइल व फिल्म जैसे संचार साधनों के कारण पूरे संसार के लोग आपस में जुड़ गए हैं। सभ्यताओं,  संस्कृतियों और  राष्ट्रीयता का एक परादेशिक और वैश्विक संस्करण पैदा हो गया है।


ऐसी परिस्थिति में नागरिकता का प्रादेशिक और वैश्विक संस्करण पैदा होना लाजमी है। किंतु दुर्भाग्यवश नागरिकता के संबंध में अंधविश्वासों के कारण नागरिकता के किसी परादेशिक और वैश्विक संस्करण पर अंतरराष्ट्रीय संधि नहीं हो पा रही है। इसकी वजह से नागरिकता को लेकर पूरे संसार में तरह-तरह के विवाद, हिंसा और युद्ध की परिस्थिति पैदा हो रही है जो दुर्भाग्यपूर्ण है।


उन्होंने आगे कहा कि वोटर्स पार्टी इंटरनेशनल इन्हीं परिस्थितियों को देखते हुए नागरिकता, राष्ट्रवाद, लोकतंत्र, संप्रभुता, स्वतंत्रता और न्याय जैसी अवधारणा का एक नया माडल लेकर जनता की अदालत में प्रस्तुत हुई है। उन्होंने सामाजिक व राजनीतिक कार्यकर्ताओं और बुद्धिजीवियों से अपील किया कि वोटर्स पार्टी इंटरनेशनल के माडल को यूटयूब चैनल के सहारे समझने की कोशिश करें और अपने अपने हिस्से की भूमिका का निर्वाह करें।


विश्वात्मा ने कहा कि निर्धन समुदाय के और मध्य वर्ग के प्रतिनिधि जब राजनीतिक सत्ता में भागीदारी पाएंगे तब प्राकृतिक संसाधनों के बदले छपही नोट का वितरण समाज के प्रत्येक व्यक्ति में बराबरी के आधार पर हो सकेगा। इसी को वोटरशिप पहले से कहा जाता है।


 


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