नाटक मध्यांतर में दिखा पति पत्नी का समर्पण

- कलाकार एसोसिएशन उत्तर प्रदेश के तत्वाधान में आयोजित लखनऊ नाट्य समारोह की पांचवी संध्या - थर्ड विंग का नाटक मध्यांतर का हुआ मंचन


लखनऊ।


कलाकार एसोसिएशन उत्तर प्रदेश और संस्कृति विभाग उत्तर प्रदेश के तत्वाधान में आयोजित लखनऊ नाट्य समारोह – 2020 की पांचवी संध्या पर बुधवार, 22 जनवरी को नाट्य संस्था थर्ड विंग के नाटक मध्यांतर का मंचन पुनीत अस्थाना और केशव पंडित के कुशल निर्देशन में किया गया। जयवर्धन के लिखे इस नाटक का संदेश है कि संबंध में स्वार्थ नहीं समर्पण और त्याग होना चाहिए।


नाटक के नायक केशव और नायिका कनिका, पति-पत्नी हैं। केशव एक निजी ड्रामा स्कूल में अभिनय का टीचर है। उनका दाम्पत्य जीवन सामान्य रूप से ठीक चल रहा था कि तभी एक दुर्घटना में केशव अपाहिज हो जाते हैं, जिसके कारण उन्हें नौकरी से निकाल दिया जाता है। ऐसी हालत में घर चलाने के लिये कनिका को नौकरी करनी पड़ती है। इस दुर्घटना में केशव से पैर से ही अपाहिज नहीं होता बल्कि वह बच्चा पैदा करने की क्षमता भी खो बैठता है। ऐसे में बच्चे के अभाव में उनके दाम्पत्य जीवन की दरार और गहरी होने लगती है। केशव को महसूस होता है कि कनिका कुछ कहती तो नहीं है, पर मां न बन पाने की कसक उसे सालती रहती है। कनिका की उस टूटन को देखते हुए केशव अपने दोस्त मनोज को कनिका से शादी कर लेने का अनुरोध करता है। दूसरी ओर मनोज उससे कहता है कि केवल बच्चे के लिये दूसरी शादी करना अकलमंदी नहीं है। केशव, जब कनिका के समक्ष इसी प्रस्ताव को रखता है तो वह आहत हो कर केशव से कहती है कि ‘‘केशव, तुम मुझे समझ ही ना सके। स्त्री-पुरुष के संबंधो की सार्थकता एक दूसरे के प्रति आस्था, विश्वास और समर्पण में है। हम दोनों एक दूसरे के पूरक हैं, बोझ नहीं...”।


केशव के किरदार में केशव पंडित और कनिका के किरदार में कनिका बालानी ने दर्शकों की प्रशंसा हासिल की। मनोज का चरित्र मनोज वर्मा और बाल कलाकार शिंकी की भूमिका ईशानी अग्रवाल ने बेहतरीन रूप में अदा की। सूत्रधार के रूप में पारुलकांत ने विभिन्न प्रसंगों को बखूबी गुथा। वरिष्ठ रंगकर्मी पुनीत अस्थाना और केशव पंडित के निर्देशन में यह नाटक जहां अभिनय के स्तर पर दर्शकों का मनोरंजन करता है वहीं वैचारिक स्तर पर दिशा भी दिखाता है। आनंद अस्थाना की मंच परिकल्पना को आशुतोष विश्वकर्मा ने मंच पर साकार किया। अंजली सचान की कास्ट्यूम डिजाइन, मनोज वर्मा के मेकअप, आशुतोष की लाइट्स और मल्लिका अग्रवाल के संगीत संचालन ने नाटक के आकर्षण को बढ़ाया। रामेन्द्र लाल के संगीत संकलन दृश्यों के अनुरूप और प्रभावी रहा। निर्माता सरोज अग्रवाल के इस नाटक की प्रस्तुति नियंत्रक नंदिता पंडित थीं।


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